भारत में केंद्रीय बजट सिर्फ आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है। हर बजट वित्त मंत्री के कार्यकाल की पहचान बन जाता है और इतिहास में दर्ज होता है। आजादी के बाद से कई वित्त मंत्रियों ने बजट पेश किए, लेकिन कुछ नाम सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने के लिए जाने जाते हैं।
मोरारजी देसाई: 10 बजट का अटूट रिकॉर्ड
इस सूची में सबसे ऊपर पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का नाम है। उन्होंने अपने कार्यकाल में रिकॉर्ड 10 बार केंद्रीय बजट पेश किया। यह एक ऐसा कीर्तिमान है जो आज तक कोई दूसरा वित्त मंत्री नहीं तोड़ पाया है। उनके द्वारा पेश किए गए बजटों की संख्या उनके लंबे और स्थिर कार्यकाल को दर्शाती है।
चिदंबरम, प्रणब और यशवंत सिन्हा भी सूची में
मोरारजी देसाई के बाद पी. चिदंबरम का नाम आता है, जिन्होंने अलग-अलग सरकारों में कुल 9 बजट पेश किए। वहीं, कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने 8-8 बार बजट पेश कर देश की आर्थिक नीतियों को दिशा दी। इन नेताओं ने अपने-अपने दौर में महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले लिए।
निर्मला सीतारमण रचेंगी नया इतिहास
मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी इस प्रतिष्ठित सूची में तेजी से ऊपर बढ़ रही हैं। 2019 में वित्त मंत्री का पद संभालने के बाद से वह लगातार बजट पेश कर रही हैं। अनुमान है कि 2026 में पेश होने वाला बजट उनका नौवां बजट होगा। इसके साथ ही वह सबसे ज्यादा बजट पेश करने के मामले में पी. चिदंबरम की बराबरी कर लेंगी, जो एक बड़ी उपलब्धि होगी।
मनमोहन सिंह और अरुण जेटली
1991 के आर्थिक सुधारों के जनक माने जाने वाले डॉ. मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में 5 बजट पेश किए थे। वहीं, अरुण जेटली भी एक प्रमुख वित्त मंत्री रहे, लेकिन 2019 में स्वास्थ्य कारणों से वे बजट पेश नहीं कर सके थे।
वे वित्त मंत्री जो बजट पेश नहीं कर पाए
भारत के बजट इतिहास में कुछ ऐसे वित्त मंत्री भी हुए हैं, जिन्हें पद पर रहने के बावजूद बजट पेश करने का अवसर नहीं मिला। इसके पीछे कार्यकाल का छोटा होना या विशेष राजनीतिक परिस्थितियां बड़ी वजह रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी वित्त मंत्री की क्षमता का पैमाना नहीं, बल्कि समय और हालात पर निर्भर करता है।
क्यों मायने रखती है बजट की संख्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजटों की संख्या उनके कार्यकाल की स्थिरता और सरकार की निरंतरता को दर्शाती है। जो वित्त मंत्री लंबे समय तक इस पद पर रहते हैं, वे देश की आर्थिक नीतियों पर अपनी गहरी छाप छोड़ते हैं। यही वजह है कि हर बजट के साथ वित्त मंत्री का नाम भारत के आर्थिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।





