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केंद्रीय बजट 2026: आज पेश होगा देश का लेखा-जोखा, जानें बजट बनने से लेकर संसद में पास होने तक की पूरी प्रक्रिया

Written by:Rishabh Namdev
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आज पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 पर देशभर की नजरें टिकी हैं। यह बजट न सिर्फ अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के खर्च और कमाई का ब्योरा देगा, बल्कि देश की आर्थिक दिशा भी तय करेगा। जानिए बजट बनाने से लेकर इसके 160 साल से भी पुराने इतिहास और संसद में पारित होने की पूरी प्रक्रिया।
केंद्रीय बजट 2026: आज पेश होगा देश का लेखा-जोखा, जानें बजट बनने से लेकर संसद में पास होने तक की पूरी प्रक्रिया

देश की आर्थिक दिशा तय करने वाले केंद्रीय बजट 2026 को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी 1 फरवरी को वित्त मंत्री संसद में देश का वार्षिक वित्तीय लेखा-जोखा पेश करेंगे। इस बजट से यह स्पष्ट होगा कि आने वाले वित्तीय वर्ष में सरकार किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी और उसकी प्राथमिकताएं क्या होंगी।

यह बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियों का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसके जरिए ही तय होता है कि कौन सी चीजें महंगी होंगी और किन पर राहत मिलेगी, साथ ही नई योजनाओं का भी ऐलान किया जाता है।

बजट क्या है और क्यों है जरूरी?

संविधान में ‘बजट’ शब्द का उल्लेख नहीं है, बल्कि इसे ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ (Annual Financial Statement) कहा गया है। यह एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें सरकार अपनी अनुमानित आय और व्यय का पूरा ब्योरा संसद के सामने रखती है। संसद की मंजूरी के बिना सरकार न तो कोई टैक्स लगा सकती है और न ही भारत की संचित निधि से कोई पैसा खर्च कर सकती है। इसलिए, बजट को संसद से पास कराना अनिवार्य होता है।

कैसे तैयार होता है देश का बजट?

केंद्रीय बजट तैयार करने की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs) की होती है। यह प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होती है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाती है। बजट पेश होने से ठीक पहले आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) जारी किया जाता है, जिसमें देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का पूरा आकलन होता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर बजट की रूपरेखा तय की जाती है।

भारत में बजट का 160 साल से भी पुराना इतिहास

भारत में बजट पेश करने की परंपरा ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही है। देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन ने पेश किया था। वहीं, स्वतंत्र भारत का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आर. के. षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को प्रस्तुत किया था। समय के साथ बजट सिर्फ आय-व्यय का हिसाब न रहकर सरकार की नीतियों को लागू करने का एक प्रमुख माध्यम बन गया है।

संसद में पारित होने की प्रक्रिया

बजट को कानूनी रूप देने के लिए एक निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

1. प्रस्तुति और सामान्य चर्चा: वित्त मंत्री के बजट भाषण के बाद संसद के दोनों सदनों में इस पर सामान्य चर्चा होती है, जहां सांसद अपनी राय रखते हैं।

2. विभागीय जांच: इसके बाद संसद की स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान मांगों (Demands for Grants) की विस्तार से जांच करती हैं और अपनी रिपोर्ट सौंपती हैं।

3. मतदान: समितियों की रिपोर्ट आने के बाद लोकसभा में मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर मतदान होता है।

4. विनियोग और वित्त विधेयक: अनुदान मांगों के पारित होने के बाद सरकार को पैसा खर्च करने की अनुमति के लिए ‘विनियोग विधेयक’ (Appropriation Bill) और टैक्स प्रस्तावों को लागू करने के लिए ‘वित्त विधेयक’ (Finance Bill) पारित किया जाता है। इन दोनों विधेयकों के पास होने के बाद ही बजट प्रक्रिया पूरी होती है।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 न केवल सरकार के खर्च का ब्योरा देगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी।