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किरण रिजिजू, रवनीत बिट्टू ने महिला सांसदों से की मारपीट; तृणमूल कांग्रेस ने लगाया बड़ा आरोप

Written by:Mini Pandey
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विरोध के दौरान तृणमूल सांसदों ने विधेयक की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री अमित शाह की ओर कागज के गोले फेंके। बनर्जी ने विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए कहा, "ईडी और सीबीआई फर्जी मामले दर्ज करते हैं जिनमें केवल 0.5 प्रतिशत सजा होती है।"
किरण रिजिजू, रवनीत बिट्टू ने महिला सांसदों से की मारपीट; तृणमूल कांग्रेस ने लगाया बड़ा आरोप

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्रियों किरेन रिजिजू और रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद में विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी पार्टी की दो महिला सांसदों शताब्दी रॉय और मिताली पर हमला किया। बनर्जी ने दावा किया कि दोनों मंत्रियों ने महिला सांसदों को धक्का दिया। यह घटना उस समय हुई जब तृणमूल सांसद तीन विवादास्पद विधेयकों के खिलाफ संसद के वेल में नारेबाजी कर रहे थे, जो गंभीर आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को 30 दिन की हिरासत के बाद हटाने का प्रावधान करते हैं। तृणमूल ने मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की है।

बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि तृणमूल के दावे पूरी तरह आधारहीन हैं। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में धक्कामुक्की का कोई सबूत नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल सांसद सबसे पहले वेल में पहुंचे थे और बाद में कांग्रेस, डीएमके और अन्य विपक्षी दल शामिल हुए। बनर्जी ने कहा, “हमारे सांसदों को धक्का देने की हिम्मत बिट्टू और रिजिजू ने की? यह बर्दाश्त नहीं होगा।”

विपक्ष असंवैधानिक बता रहा

विवाद का केंद्र तीन विधेयक हैं, जिन्हें विपक्ष असंवैधानिक बता रहा है। इन विधेयकों में संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसके तहत 30 दिन तक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों या अन्य मंत्रियों को पद से हटना होगा। विरोध के दौरान तृणमूल सांसदों ने विधेयक की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री अमित शाह की ओर कागज के गोले फेंके। बनर्जी ने विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए कहा, “ईडी और सीबीआई फर्जी मामले दर्ज करते हैं जिनमें केवल 0.5 प्रतिशत सजा होती है।”

कौन-कौन से विधेयक

गृहमंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि इन विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजा जाएगा, जहां विपक्ष सहित सभी सांसद अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे। सरकार ने संविधान 130वां संशोधन विधेयक 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2025 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति को सौंपने का फैसला किया है, जो शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

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