पश्चिम बंगाल की राजनीति में अचानक एक बड़े भूचाल ने तृणमूल कांग्रेस के तीन दशक पुराने इतिहास को हिला दिया है। दरअसल पार्टी के भीतर हुई इस अप्रत्याशित बगावत के बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने विद्रोही विधायकों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बागी नेताओं को पूरी तरह बेकार बताते हुए स्पष्ट किया कि ये नेता केवल ममता बनर्जी के करिश्मे के सहारे अपनी राजनीति चमकाते रहे और अब उनमें विपक्ष में बैठकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लड़ने का साहस नहीं बचा है।
दरअसल तृणमूल कांग्रेस, जो अपने लगभग तीन दशक पुराने इतिहास में पहली बार सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है, में यह विभाजन 58 बागी विधायकों द्वारा विधानसभा दल पर कब्जा करने और निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी को अपना नेता चुनने के बाद सामने आया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के उपरांत पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने भी नए विधानसभा दल को मान्यता दे दी है, जिससे पार्टी में महासंग्राम की स्थिति और गहरी हो गई है।
जानिए महुआ मोइत्रा ने क्या कहा?
एक मीडिया चैनल को दिए एक साक्षात्कार में महुआ मोइत्रा ने संगीन आरोप लगाए कि भाजपा ने दबाव और डर का माहौल बनाकर तृणमूल कांग्रेस में यह टूट कराई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से कई विधायक पार्टी छोड़कर दूसरे खेमे में शामिल हो गए। मोइत्रा ने मजबूती से कहा, “हमारे बीच कुछ ऐसे लोग थे जो पूरी तरह बेकार थे। वे ममता दीदी के करिश्मे का फायदा उठाकर पार्टी में बने हुए थे। आज अगर उन्हें जाना है तो जाएं, अपने रितब्रत कांग्रेस का हिस्सा बनें, जो करना है करें, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस न कहें।” यह बयान पार्टी के भीतर की कड़वाहट को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
TMC में विभाजन ने बटोरी सुर्खियां
दरअसल बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के इतिहास में पहली बार इतना बड़ा विभाजन देखने को मिला, जब 58 बागी विधायकों ने पार्टी के विधानसभा दल पर कब्जा जमा लिया। उन्होंने निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी को अपना नेता चुनकर सियासी समीकरण बदल दिए। यद्यपि रितब्रत बनर्जी ने बगावत को नरम करने का प्रयास करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से नए विधानसभा दल की मुख्य सलाहकार बनने का आग्रह किया, किंतु बागी विधायक विधानसभा में स्वयं को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ बताकर अपनी स्थिति पर अडिग हैं।
पूरा देश देख रहा है : महुआ मोइत्रा
महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि अब वह केवल पार्टियां तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्ष के नेताओं को भी अपने हिसाब से तय करना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया, “आज पूरा देश देख रहा है कि भाजपा अब विपक्ष के नेताओं को भी चुनना चाहती है। वह सिर्फ पार्टियां तोड़ना नहीं चाहती, बल्कि यह भी तय करना चाहती है कि जिन राज्यों में वह जीती है वहां विपक्ष का नेता कौन होगा।” यह बयान भाजपा की रणनीति पर सीधा हमला है।
इस पूरी राजनीतिक कार्रवाई के पीछे वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की भूमिका को लेकर महुआ मोइत्रा ने गंभीर दावे किए। उन्होंने कहा कि सुवेंदु अधिकारी कभी तृणमूल कांग्रेस के सक्रिय नेता रहे हैं और उन्हें हर विधायक की कमजोरियों की पूरी जानकारी है। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि सुवेंदु अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से एक-एक विधायक को निशाना बनाकर उन पर दबाव बनाया।






