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BUDGET 2026–27: टैक्स, टेक्नोलॉजी, निवेश और राज्यों को लेकर बड़े फैसले, रिफॉर्म की रफ्तार बरकरार

Written by:Rishabh Namdev
Published:
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए सुधारों की गति बनाए रखने का संदेश दिया है। इस बजट में टैक्स प्रणाली को सरल बनाने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
BUDGET 2026–27: टैक्स, टेक्नोलॉजी, निवेश और राज्यों को लेकर बड़े फैसले, रिफॉर्म की रफ्तार बरकरार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए आर्थिक सुधारों की रफ्तार को बनाए रखने का स्पष्ट संकेत दिया है। इस बजट में सरकार ने टैक्स प्रणाली में सरलता, टेक्नोलॉजी, विदेशी निवेश को प्रोत्साहन और राज्यों के वित्तीय सशक्तिकरण पर जोर दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि विकास की दिशा में नीतिगत स्पष्टता बनी रहेगी और सुधारों की प्रक्रिया जारी रहेगी।

निवेश और शेयर बाजार को बूस्ट

विदेशी निवेश को गति देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तिगत निवेशक (PROI) भी पोर्टफोलियो निवेश योजना के तहत भारतीय कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकेंगे। सरकार ने इनके लिए निवेश की सीमा भी 5% से बढ़ाकर 10% करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे शेयर बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर पर फोकस

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं। जो विदेशी कंपनियां भारत स्थित डेटा सेंटर्स का उपयोग कर वैश्विक ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देंगी, उन्हें 2047 तक टैक्स हॉलिडे मिलेगा। इसके साथ ही, सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य उपकरण निर्माण, सामग्री विकास और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का बजट भी बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया जाएगा।

आम करदाताओं को मिली बड़ी राहत

बजट में छोटे और मध्यम करदाताओं को राहत देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। तकनीकी चूकों से जुड़े कई मामलों में पेनल्टी को अब फीस में बदल दिया जाएगा। कर विवादों को कम करने के लिए री-असेसमेंट प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी रिटर्न अपडेट करने की सुविधा दी जाएगी।

छोटे करदाताओं के लिए एक नई योजना के तहत अब ऑटोमेटेड प्रक्रिया से लो या निल TDS सर्टिफिकेट मिल सकेगा, जिसके लिए असेसिंग ऑफिसर के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले ब्याज पर अब कोई TDS नहीं कटेगा और यह पूरी तरह आयकर मुक्त होगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य और NRI के लिए अहम घोषणाएं

सरकार ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और चिकित्सा खर्चों के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर TCS की दर 5% से घटाकर 2% कर दी है। छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स, टेक कर्मचारियों और NRI के लिए छह महीने की एकमुश्त विदेशी संपत्ति घोषणा योजना का भी प्रस्ताव किया गया है।

मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को सहारा

घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई घोषणाएं की हैं। परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जरूरी सामान के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट को 2035 तक बढ़ा दिया गया है। लिथियम-आयन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, सोलर ग्लास और संबंधित इनपुट पर भी कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है। इसके अलावा, समुद्री खाद्य और फुटवियर निर्यात से जुड़े इनपुट पर ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा भी बढ़ाई जाएगी।

राज्यों की हिस्सेदारी और वित्तीय स्थिति

केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्यों के लिए वर्टिकल शेयर 41% पर बरकरार रखा है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को कुल ₹1.4 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि देश का ऋण-से-जीडीपी अनुपात 55.6% और राजकोषीय घाटा 4.3% रहने का अनुमान है। वहीं, गैर-ऋण प्राप्तियां ₹36.5 लाख करोड़ रहने की उम्मीद है। बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है।