केंद्र सरकार ने बजट 2026 में पूर्वोत्तर भारत को एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में पूर्वोत्तर के छह राज्यों के लिए एक नए बौद्ध सर्किट और 4,000 इलेक्ट्रिक बसों की योजना का अनावरण किया।
इस दोहरी पहल का उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना है।
बौद्ध सर्किट से संवरेगी विरासत
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा को शामिल किया गया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य इस क्षेत्र की समृद्ध बौद्ध विरासत को संरक्षित करना और तीर्थ पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है।
बजट प्रस्ताव के अनुसार, इस सर्किट में आने वाले प्राचीन मंदिरों और मठों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए तीर्थ व्याख्या केंद्र, बेहतर आवास और संपर्क मार्गों का निर्माण होगा, ताकि पूरे साल पर्यटन गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें।
हरित परिवहन के लिए 4,000 ई-बसें
पर्यटन स्थलों तक पहुंच को आसान और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सरकार ने 4,000 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव रखा है। ये बसें प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों के लिए लास्ट-माइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेंगी, जिससे पर्यटकों को आवाजाही में आसानी होगी।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में स्वच्छ, शांत और टिकाऊ परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विकास और संस्कृति का संगम
बौद्ध सर्किट और इलेक्ट्रिक बसों की यह संयुक्त पहल दर्शाती है कि सरकार पर्यटन को सिर्फ आर्थिक लाभ के तौर पर नहीं देख रही है। बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण और रोजगार सृजन को एक साथ साधना है।
बजट 2026 के ये प्रस्ताव पूर्वोत्तर को न केवल आध्यात्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करेंगे, बल्कि हरित बुनियादी ढांचे और सतत विकास की नींव भी मजबूत करेंगे।





