1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026 की पेशकश की है। जिसे लेकर राजनीतिक हलचल भी देखने को मिल रही है। बजट (Union Budget 2026) और केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे दिशाहीन और लक्ष्यहीन बताया है। बंगाल सीएम ने कहा, “बजट महिलाओं, गरीबों, युवाओं, किसानों, एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के खिलाफ है।”
ममता बनर्जी ने दावा किया किया कि बजट में शिक्षा के लिए कुछ खास नहीं है। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सब्सिडी में कटौती करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि, “बड़े-बड़े दावों के बावजूद तथाकथित बड़ी बातें झूठ का पुलिंदा है। जिसका असर पहले से ही नजर आ रहा है। बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स 1,100 से ज्यादा गिर चुका है। वहीं निफ्टी 2500 से नीचे पहुंच चुका है।”
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पश्चिम बंगाल ने किए कुछ भी नहीं- ममता बनर्जी
केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि, “राज्य से जीएसटी वसूला जाता है, लेकिन बंगाल को उसका हक नहीं मिलता। फंड रोक दिया जाता है। बजट में बंगाल के लिए एक भी पैसा नहीं है।” उन्होंने केंद्र सरकार के पास करीब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया होने का आरोप लगाया। आगे कहा कि, “भारत की अर्थव्यवस्था की नहीं बल्कि संवैधानिक ढांचे, स्वतंत्र संस्थाओं, सामाजिक क्षेत्र, आर्थिक ढांचे और संघवाद को भी खत्म किया जा रहा है।”
अभिषेक ने क्या क्या?
बजट को लेकर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान भी सामने आया है। उन्होंने इसे ‘फेसलेस, बेसलेस और विजिनलेस’ बताया। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि, “इसमें देश के लिए कोई गंभीर आर्थिक रोडमैप नहीं है। 5100 सेकंड के भाषण में वित्त मंत्री ने एक बार भी बंगाल शब्द का उच्चारण नहीं किया। यह बंगाल के प्रति सरकार की शून्य चिंता और शून्य सम्मान को दर्शाता है।” आगे कहा कि, “पहले से ही बेंगलुरु में NIMHANS मौजूद है। झारखंड और असम के लिए नए एनआईएमएचएएनएस की घोषणा की गई है। बंगाल को कुछ नहीं मिला।” उन्होंने आरोप लगाए कि बजट में रोजगार रोडमैप, विकास का विजन और भविष्य की प्लानिंग जैसी बातें नहीं है।