Hindi News

अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के रवैये को बताया पक्षपातपूर्ण, बोले- वोटर लिस्ट से हटाए गए 30 लाख असली मतदाताओं के नाम

Written by:Ankita Chourdia
Published:
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के पक्षपातपूर्ण रवैये पर गंभीर सवाल उठाए, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का प्रण लिया।
अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के रवैये को बताया पक्षपातपूर्ण, बोले- वोटर लिस्ट से हटाए गए 30 लाख असली मतदाताओं के नाम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की भारी बहुमत से जीत और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण के साथ ही तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। डायमंड हार्बर सीट से लोकसभा सदस्य बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से सरकारी एजेंसियों और भारत के चुनाव आयोग के रवैये को पक्षपातपूर्ण बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

उन्होंने अपने पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा कि तृणमूल कांग्रेस ने एक बेहद मुश्किल चुनाव लड़ा है, जिसमें लगभग 30 लाख असली मतदाताओं को कथित तौर पर वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इस पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान, बनर्जी ने यह भी बताया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों और विशेष रूप से भारत के चुनाव आयोग का रवैया कितना पक्षपातपूर्ण रहा। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाएं, जिन्हें निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, वे भी संदेह के घेरे में आ गईं, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

अभिषेक बनर्जी ने ईवीएम और मतगणना प्रक्रिया पर उठाए सवाल

इसके अतिरिक्त, उन्होंने वोटों की गिनती से लेकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के लाने-ले जाने और उनके रखरखाव से जुड़े आरोपों तक कई ऐसी परेशान करने वाली घटनाओं का जिक्र किया। इनमें कंट्रोल यूनिट का मेल न खाना जैसे मामले भी शामिल थे, जिनसे लाखों लोगों के मन में यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या वास्तव में लोगों के असली जनादेश का सम्मान किया गया है। अभिषेक बनर्जी ने पहले ही वोटों की गिनती वाले केंद्रों से सीसीटीवी फुटेज जारी करने और वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) पर्चियों की पारदर्शी तरीके से गिनती कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और हर शक-शुबहे का जवाब खुले और ईमानदारी से दिया जा सके।

TMC कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का लगाया आरोप

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकतंत्र तभी जीवित रह सकता है, जब चुनावी संस्थाएं नागरिकों के मन में भरोसा और विश्वास पैदा करें। दुर्भाग्यवश, उन्होंने जो कुछ देखा है, उससे यह भरोसा बुरी तरह से टूटा है। इसके साथ ही, चुनाव के बाद हुई हिंसा, पार्टी दफ्तरों पर हमले, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना और समर्थकों को धमकियां देना जैसी बातें एक लोकतांत्रिक समाज में अत्यधिक चिंताजनक और किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न करने वाली हैं। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल के कई ऐसे कार्यकर्ता और समर्थक, जिन्होंने जमीन पर उतरकर दिन-रात मेहनत की, उन पर कथित तौर पर जान-बूझकर हमले किए गए, जिसके चलते उन्हें डर और असुरक्षा के कारण अपने घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा।

इन सभी चुनौतियों के बावजूद, अभिषेक बनर्जी ने यह संकल्प दोहराया कि तृणमूल कांग्रेस दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों ही जगहों पर एक मजबूत, मुखर और अपने सिद्धांतों पर अडिग विपक्ष की भूमिका निभाती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में, लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों व सम्मान के लिए उनकी लड़ाई बिना किसी डर और बिना किसी समझौते के लगातार जारी रहेगी। यह बयान भाजपा की जीत के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस की भूमिका को लेकर एक स्पष्ट संकेत देता है।

Ankita Chourdia
लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews