कोलकाता: पश्चिम बंगाल में लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि उनकी सरकार मार्च 2026 से बकाया महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान शुरू करेगी। यह भुगतान ROPA-2009 के नियमों के अनुसार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने दोपहर लगभग 3:05 बजे अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “हमारी मातृ-समाज-जनता की सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों, पेंशनर्स, लाखों टीचर और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों, पंचायत-खरीद कर्मचारियों और पेंशनर्स को इसका पेमेंट करने का वादा किया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि बकाया डीए का भुगतान मार्च 2026 से शुरू होगा।

भुगतान की प्रक्रिया क्या होगी?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि बकाया भुगतान की पूरी प्रक्रिया और उसका शेड्यूल राज्य का वित्त विभाग एक विस्तृत अधिसूचना के जरिए जारी करेगा। इस अधिसूचना में यह साफ किया जाएगा कि किस कर्मचारी को कितना और कैसे भुगतान किया जाना है। इस घोषणा से उन लाखों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से अपने बकाए का इंतजार कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और सरकार का रुख

यह मामला लंबे समय से कानूनी लड़ाई में भी फंसा हुआ है। गौरतलब है कि 6 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वह बकाया डीए का 25 प्रतिशत भुगतान करे और शेष 75 प्रतिशत 31 मार्च तक दे दे। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बाद भी कर्मचारी संगठनों को सरकार की मंशा पर संदेह था।

इसके बाद, 6 मार्च को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल कर कहा कि पहली किस्त का 25 प्रतिशत भुगतान करना फिलहाल संभव नहीं है। सरकार ने तर्क दिया कि 2016 से पहले नियुक्त हुए कर्मचारियों की सर्विस बुक ढूंढने में काफी समय लग रहा है, जिससे भुगतान में देरी हो रही है।

बजट में 4% की बढ़ोतरी से बढ़ा था कन्फ्यूजन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने 2026 के अंतरिम बजट में सरकारी कर्मचारियों के डीए में 4 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की घोषणा की थी। इस बढ़ोतरी से कुल डीए 18% से बढ़कर 22% हो गया था, जिसे 1 अप्रैल, 2026 से लागू करने का प्रस्ताव था। इस घोषणा ने कर्मचारियों के बीच बकाया भुगतान को लेकर भ्रम पैदा कर दिया था।

“यह देना ही होगा, नहीं तो जेल जाने का डर है। बकाया DA देना ही होगा, यह सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है। कम से कम यह साफ करने की कोशिश तो की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर का पालन हो रहा है, लेकिन यह कितना असरदार होगा, देखते हैं।”- विकास रंजन भट्टाचार्य, माकपा नेता

विपक्षी दल सरकार की इस घोषणा को सुप्रीम कोर्ट के दबाव का नतीजा मान रहे हैं। माकपा नेता और वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार को यह बकाया देना ही पड़ेगा, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है और इसका पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।