सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विशेष गहन पुनरीक्षण (West Bengal SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा कदम उठाया है। चुनाव अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। इसके अलावा 19 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों का पालन करने का निर्देश राज्य प्रशासन और पुलिस को दिया गया है।

लॉजिकल विसंगतियों और अनमैप्ड श्रेणी के तहत घोषित नामों के सार्वजनिक प्रदर्शन को भी अनिवार्य किया गया है। प्रभावित मतदाताओं को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा करने और अपनी बात रखने का मौका भी दिया। 24 जनवरी 2026 तक ग्राम पंचायत भवन, प्रत्येक तालुका, ब्लॉक और वार्ड कार्यालय में इन श्रेणियों में रखे गए नाम प्रकाशित करने का आदेश दिया गया है। ऐसे लोगों को नाम प्रकाशित होंने के 10 दिन के अंदर आपत्ती, दस्तावेज और दावों को निर्धारित अधिकारियों के पास जमा करना होगा। दस्तावेजों को जमा करने के बाद एक रसीद भी जारी की जाएगी। माध्यमिक एडमिट कार्ड भी मान्य होगा।

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प्रशासन और पुलिस को सख्त निर्देश जारी 

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए मुख्य सचिव, डीजीपी बंगाल और पुलिस आयुक्त को भी निर्देश भी जारी किए गए हैं। पर्याप्त मैनपॉवर तैनात करने को कहा गया है। सुचारु संचालन के साथ-साथ कानून व्यवस्था बनी रहे, यह सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा किसी भी गैर अनुपालन पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया है।

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EC ने चुनाव अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा 

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के कुछ चुनाव अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि कार्रवाई तय नियमों पालन किए बिना की गई है। इन मामलों में चुनाव आयोग से कोई भी सलाह नहीं ली गई थी। इसलिए आयोग ने इन कार्रवाइयों को प्रक्रियात्मक रूप से गलत बताया है। संबंधित अधिकारियों से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण और अनुशासनात्मक रिकॉर्ड की मांग की है। ताकि इसकी दोबारा जांच हो सके। इस काम को पूरा करने के लिए 24 जनवरी शाम 5 बजे तक का समय दिया गया है ।

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