वैसे तो विश्व भर में कई सारे शिवलिंग मौजूद हैं, जिनका अपना महत्व है। किसी से पुरानी कहानी जुड़ी हुई है तो कोई अपनी खासियत की वजह से पहचाना जाता है। इसी तरह से आज तमिलनाडु में निर्मित विश्व के सबसे ऊंची शिवलिंग की स्थापना होने जा रही है। पिछले 10 सालों से इसका निर्माण किया जा रहा था।
मोतिहारी के विराट रामायण मंदिर में 33 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थापित किया जा रहा है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में पिछले 10 सालों से इसका निर्माण किया जा रहा था। चलिए इस शिवलिंग के बारे में जान लेते हैं।
विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग
ब्लैक ग्रेनाइट मोनालिथ से बना 210 तन मीट्रिक वजन का यह शिवलिंग आधार पीठ पर स्थापित कर दिया गया है, 1008 सहस्त्रलिंगम से युक्त है। 46 दिनों की यात्रा करने के बाद 5 जनवरी 2026 को यह अपने स्थान पर पहुंचा है।
आधार पीठ पर होगा स्थापित
इस शिवलिंग को मंदिर परिसर में बनाया गया आधार पीठ पर स्थापित किया जाएगा। इसके लिए कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार को इसे खड़ा कर लिया गया है। शिवलिंग ठीक उसी स्थान पर खड़ा किया गया है जहां आधार पीठ बनाया गया है। अब सहस्त्रलिंगम को स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।
10 सालों तक चल निर्माण
इस शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टिकाडू गांव में पिछले 10 सालों से किया जा रहा था। ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से यह 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग कलाकारों ने शिल्पकार हेमलता देवी की देखरेख में अथक परिश्रम से तैयार किया है। पीठ पूजा में इन सभी शिल्पकारों को बुलाया गया है। उन्हें मंदिर निर्माण समिति की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
46 दिन की यात्रा के बाद पहुंचा मंदिर
विश्व के इस सबसे बड़े शिवलिंग को महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर तक लाने में 46 दिन का समय लगा। 21 नवंबर को इसे रवाना किया गया था। ये तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश होता हुआ 2565 किमी से ज्यादा की दूरी तय करते हुए 5 जनवरी को मंदिर परिसर में पहुंचा। शिवलिंग की देखने के लिए भक्त उत्साहित हैं और बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार को मंदिर परिसर में शिवलिंग खड़ा किए जाने के दौरान भक्तों की भीड़ हर हर महादेव के नारे लगा रही थी।





