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लोन निकलवाने के बदले बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी ने ली रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ दबोचा

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
Published:
सत्यापन में आरोप सही पाए जाने पर आज 24 नवंबर 2025 को टीम ने मनासा स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा में ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी रुपेश कौशल को आवेदक से निर्धारित रिश्वत राशि 15,000 रुपये लेते ही दबोच लिया।
लोन निकलवाने के बदले बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी ने ली रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ दबोचा

lokayukta police action

मध्य प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त है एजेंसियों को घूसखोरी की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश हैं इसलिए लोकायुक्त पुलिस  एक्शन मोड में रहती है, इसी क्रम में आज उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने नीमच के मनासा में बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

लोकायुक्त पुलिस उज्जैन के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक मनासा निवासी आंचल नागदा ने 21 नवंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन आनंद यादव को एक शिकायती आवेदन दिया था, जिसमें बैंक ऑफ़ इंडिया में पदस्थ कर्मचारी पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाये थे।

लोन निकलवाने के बदले कर्मचारी ने मांगी रिश्वत 

शिकायती आवेदन में आंचल ने बताया कि उसने बैंक ऑफ़ इंडिया मनासा शाखा में लोन के लिए आवेदन किया था, यहाँ पदस्थ कर्मचारी रुपेश कौशल ने उनसे लोन निकलवाने के बदले 15,000 रुपये रिश्वत की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने इसका सत्यापन कराया।

रिश्वत की राशि हाथ में आते ही कर्मचारी गिरफ्तार  

एसपी के निर्देश पर शिकायत का सत्यापन लोकायुक्त निरीक्षक हिना डाबर ने किया। सत्यापन में आरोप सही पाए जाने पर आज 24 नवंबर 2025 को टीम ने मनासा स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा में ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी रुपेश कौशल को आवेदक से निर्धारित रिश्वत राशि 15,000 रुपये लेते ही दबोच लिया।

आरोपी बैंक कर्मचारी पर मामला दर्ज 

लोकायुक्त की टीम द्वारा मौके पर पंचनामा तैयार कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। लोकायुक्त ने आरोपी कर्मचारी रुपेश कौशल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर जाँच में ले लिया है।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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