नीमच: जिले के मनासा में कृषि भूमि पर नियमों को दरकिनार कर अवैध कॉलोनी काटने का मामला अब कलेक्टर की जनसुनवाई तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि आर. सागर कछावा ने इस संबंध में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने भूमाफिया के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भूमाफिया काईद जौहर बोहरा ने बिना किसी सरकारी अनुमति के कृषि भूमि पर छोटे-छोटे भूखंड काटकर बेच दिए, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
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नियमों को ताक पर रखकर बेचे भूखंड
आर. सागर कछावा ने अपनी शिकायत में बताया कि मनासा के सर्वे नंबर 382/2, 383/2, 384, 333 और 435 की कृषि भूमि पर अवैध रूप से कॉलोनी विकसित की गई है। आरोप है कि इसके लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP), नगर परिषद और रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) जैसे किसी भी जिम्मेदार विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई। भूमाफिया ने मनमाने ढंग से कृषि भूमि को आवासीय भूखंडों में बदलकर बेच दिया।
करोड़ों की स्टांप ड्यूटी चोरी का आरोप
शिकायत में एक और बड़ा आरोप स्टांप ड्यूटी की हेराफेरी का लगाया गया है। कछावा के अनुसार, भूमाफिया ने सरकारी गाइडलाइन से काफी कम दर पर इन भूखंडों की रजिस्ट्रियां करवाई हैं। इस तरीके से स्टांप ड्यूटी में करोड़ों रुपये की चोरी की गई, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने इस पूरे गोरखधंधे की गहन जांच की मांग की है।
प्रशासनिक रोक के बावजूद बिक्री जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद ने संबंधित भूमि के नामांतरण पर रोक लगा दी है। हालांकि, शिकायतकर्ता का दावा है कि इस रोक के बावजूद भूखंडों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला अब भी जारी है। इससे पता चलता है कि भूमाफिया के हौसले कितने बुलंद हैं और उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर नहीं है। कछावा ने मांग की है कि क्षेत्र की सभी अवैध कॉलोनियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इसमें शामिल अधिकारियों व भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट