जन्माष्टमी के दिन नीमच से आई एक खबर ने सभी के दिल को जीत लिया। दरअसल जिला चिकित्सालय में एक गंभीर रूप से घायल मासूम को जन्माष्टमी के शासकीय अवकाश के दिन भी समय पर इलाज मिला। बच्चे का नाम ‘कान्हा’ था और वह कोहनी के पास गंभीर फ्रैक्चर के साथ अस्पताल पहुंचा था। चोट के कारण हाथ में अत्यधिक सूजन, लालिमा, त्वचा पर ब्लिस्टरिंग और नाड़ी कमजोर महसूस हो रही थी। वहीं स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत इमरजेंसी में लेकर ऑपरेशन करने का फैसला लिया।
दरअसल शासकीय अवकाश होने के बावजूद अस्थिरोग विभाग, एनेस्थीसिया टीम और ऑपरेशन थिएटर का स्टाफ तत्काल सक्रिय हुआ। बच्चे का Supracondylar Humerus Fracture का सफल ऑपरेशन किया गया। बता दें कि यह जिला चिकित्सालय, नीमच में मेडिकल कॉलेज के अस्थिरोग विभाग द्वारा किया गया पहला इमरजेंसी ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन भी रहा।
मेडिकल कॉलेज की पहली इमरजेंसी ऑर्थोपेडिक सर्जरी
इस ऑपरेशन का नेतृत्व अस्थिरोग विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने किया। उनके साथ सीनियर रेजिडेंट डॉ. अतुल सोलंकी ने सहयोग किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. कुणाल चौहान और डॉ. अवि शर्मा शामिल रहे। ऑपरेशन थिएटर में नर्सिंग ऑफिसर कल्पना मुछावत, सचिन भट्ट, ओटी टेक्नीशियन अमित यादव और नेहा अहिरवार के साथ सहयोगी स्टाफ कुलदीप और कैलाश ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।
समय पर उपचार बेहद जरूरी था
डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने बताया कि गंभीर फ्रैक्चर और चोट के मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय में अस्थिरोग की आपातकालीन शल्य चिकित्सा सेवाएं शुरू करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि आगे भी कोशिश रहेगी कि गंभीर चोट वाले मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही जरूरी सर्जरी और विशेषज्ञ इलाज मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में अस्थिरोग की इमरजेंसी और दूसरी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि नीमच और आसपास के मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करने की जरूरत कम पड़े।
इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करने की बात कही
वहीं मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. आदित्य बेरड़ ने कहा कि मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इमरजेंसी सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उनके मुताबिक गंभीर मामलों में अलग-अलग विशेषज्ञ विभागों के समन्वय से तत्काल उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल ने भी कहा कि जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिले और उन्हें अनावश्यक रूप से बाहर रेफर न करना पड़े, इसके लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सेवाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है।
कमलेश सारडा, नीमच






