नीमच शहर के हायर सेकेंडरी मैदान को बचाने की चल रही मुहिम के तहत मंगलवार को एक अनोखा और मार्मिक दृश्य देखने को मिला। रोजाना मैदान पर खेल अभ्यास करने वाले बच्चों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर मूकबधिर छात्रावास के सामने सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। सरकार से मैदान को बचाने की मांग की। का यह मौन प्रदर्शन शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
मूक बधिर छात्रावास के सामने कतारबद्ध खड़े होकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि, “छात्रावास के बच्चों को कुदरत ने मूक बधिर बनाया है, लेकिन मैदान पर प्रैक्टिस करने वाले इन बच्चों को व्यवस्था की अनदेखी ने चुप रहने पर मजबूर किया है।” उनका कहना है कि वे लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांग को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है।
भ्रम फैलाने वालों को मिला कड़ा जवाब
मैदान बचाओ आंदोलन को लेकर शहर में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं हो रही हैं। इसे प्राइवेट स्कूलों और अकादमियों से जोड़ा गया तो कभी इसे कुछ ही खिलाड़ियों का आंदोलन बताया गया। हालांकि, मंगलवार को बड़ी संख्या में बच्चों के मैदान पर उतरकर किए गए इस मौन प्रतिरोध ने ऐसे तमाम भ्रमों को खारिज कर दिया है। छात्रों का इस मैदान से सीधा जुड़ाव उनके खेल, अभ्यास और भविष्य के सपनों से है।
18वें दिन भी जारी रहा धरना
एक तरफ जहां बच्चों ने अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं मैदान बचाओ समिति का क्रमिक धरना 18वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान मुफद्दल टाइगर क्रिकेट टीम के मूर्तुजा डेरकी की अगुआई में कई खेल प्रेमियों और नागरिकों ने धरना स्थल पर बैठकर मैदान बचाने की मांग का समर्थन किया।
समर्थन देने वालों में अली शेख, मोहम्मद लाइटवेल, मोहसिन कुरैशी, विमल शर्मा, समीर कुरैशी, आदित्य शर्मा, सोनू शर्मा, मोहसिन राज, मुस्तफा पानवाला, कुतुब नम्बरदार, हसन डेरकी, शब्बीर मिठाईवाला और पप्पू सिंग सहित कई लोग शामिल रहे। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मैदान केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि शहर की खेल संस्कृति और युवाओं के भविष्य की धुरी है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले को कब गंभीरता से लेंगे।
कमलेश सारडा की रिपोर्ट






