नीमच पिछले साल अप्रैल 2025 में दुबई फरार हुए नीमच के बहुचर्चित सट्टा किंग राहुल बागड़ी पर शिकंजा कसने की पुलिसिया तैयारी अब सरकारी फाइलों में उलझती नजर आ रही है। एक तरफ नीमच पुलिस का दावा है कि इस हाई-प्रोफाइल और अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी के मामले को स्टेट साइबर सेल को ट्रांसफर कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ स्टेट साइबर सेल का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई फाइल पहुंची ही नहीं है। इस बड़े विरोधाभास ने जांच की गति, पुलिस की समन्वय प्रणाली और सट्टा माफियाओं पर कार्रवाई की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राहुल बागड़ी पर क्रिकेट सट्टे के जरिए करोड़ों की बेनामी संपत्ति अर्जित करने और विदेश से सट्टा नेटवर्क चलाने का आरोप है। विगत वर्ष जब यह मामला सामने आया था, तब नीमच एसपी अंकित जायसवाल ने सट्टेबाजों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्टेट साइबर सेल को सौंपने की बात कही थी, ताकि हवाला नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय सट्टा सिंडिकेट को तोड़ा जा सके। लेकिन अब स्थिति यह है कि स्थानीय पुलिस और साइबर सेल, दोनों ही फाइल के स्टेटस को लेकर एकमत नहीं हैं।
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पड़ताल: फाइल के सफर में कहां है पेंच?
जब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की गई तो एक बेहद चौंकाने वाली स्थिति सामने आई नीमच एसपी का कहना है कि फाइल ट्रांसफर की जा चुकी है, आगे की जानकारी साइबर सेल से मिलेगी। वहीं साइबर सेल उज्जैन के निरीक्षक हरेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसी कोई फाइल नहीं आई है। स्टेट साइबर ब्रांच उज्जैन के लैंडलाइन (0734-2536874) पर चर्चा करने पर बताया गया कि फाइल भोपाल से स्टेट साइबर एसपी (इंदौर) के पास आती है और वहां से डिस्ट्रीब्यूट होती है। फिलहाल वहां भी फाइल रिसीव होने की कोई पुष्टि नहीं है।
दुबई में बैठा है मास्टरमाइंड, यहां संपत्तियों पर सिर्फ बातें
पिछले वर्ष 24 अप्रैल को इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा अरुण नामक आरोपी को पकड़े जाने के बाद राहुल बागड़ी का नाम सामने आया था। एफआईआर की भनक लगते ही राहुल 25 अप्रैल को जयपुर से फ्लाइट लेकर दुबई फरार हो गया। इस मामले में पुलिस ने इमिग्रेशन विभाग को लुक आउट सर्कुलर (LOC) का प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन गिरफ्तारी तो दूर, फाइल की लोकेशन ही तय नहीं है।
करोड़ों की बेनामी संपत्ति
पुलिस जांच में सामने आया था कि स्कीम नंबर 34, 36 और मिराज सिनेमा रोड पर बागड़ी की करोड़ों की बेनामी संपत्ति है। इन अवैध संपत्तियों को लेकर आईपीसी की धारा 107 (या नई दंड संहिता के समतुल्य) के तहत संपत्ति राजसात (कुर्क) करने की तैयारी थी, लेकिन फाइल ट्रांसफर के पेंच में यह कार्रवाई भी पूरी तरह से ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। नीमच सिटी और बघाना पुलिस द्वारा पकड़े गए गुर्गे यश आंजना और राहुल किलोरिया के बयानों के आधार पर जो ‘रॉकी बुक’ नेटवर्क ध्वस्त होना था, वह भी विभागीय पत्राचार में उलझ गया है।
एक्सपर्ट व्यू: फाइल अटकने से किसे फायदा?
जानकारों का मानना है कि जब तक पुलिस विभागों के बीच पत्राचार (Correspondence) का यह कन्फ्यूजन दूर नहीं होगा, तब तक दुबई में बैठे आरोपी को अपना स्थानीय नेटवर्क फिर से फैलाने और मामले को ‘मैनेज’ करने का पूरा मौका मिलेगा। ऐसे में एक हाई-प्रोफाइल केस की फाइल का इस तरह ‘मिसिंग’ या ‘पेंडिंग’ होना सट्टा माफिया के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी फाइल ढूंढने और कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।