Hindi News

नीमच: सीएम राइज स्कूल भवन अटका, चार वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सका काम, हजारों बच्चों का भविष्य अधर में

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
Published:
भवन निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार कर भोपाल मुख्यालय भेजी जा चुकी है, लेकिन पिछले चार महीनों से फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है। यह मुद्दा विधानसभा तक में उठ चुका है, इसके बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
नीमच: सीएम राइज स्कूल भवन अटका, चार वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सका काम, हजारों बच्चों का भविष्य अधर में

CM Rise School Neemuch

नीमच जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्वीकृत सीएम राइज स्कूल भवन निर्माण योजना लंबे समय से फाइलों में अटकी हुई है। करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित इस भवन को लेकर चार वर्षों बाद भी जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका है, जिससे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, भवन निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार कर भोपाल मुख्यालय भेजी जा चुकी है, लेकिन पिछले चार महीनों से फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है। यह मुद्दा विधानसभा तक में उठ चुका है, इसके बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। ग्रामीण और जरूरतमंद परिवारों के बच्चे पिछले दो-तीन वर्षों से बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित हैं।

स्वीकृति मिलने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं 

शुरुआत में भूमि चयन को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान बनी रही। पहले हवाई पट्टी और फिर ईंट भट्टा क्षेत्र का चयन हुआ, लेकिन विभिन्न कारणों से मामला अटकता रहा। अंततः शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक दो की भूमि पर सहमति बनी और प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति भी मिल गई।

 आंदोलन हुए अब भोपाल में अटकी फ़ाइल

इस दौरान पालक महासंघ ने कई बार प्रदर्शन कर जिम्मेदारों को ज्ञापन सौंपे और आंदोलन की चेतावनी दी। बावजूद इसके निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। जिला शिक्षा विभाग ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर फाइल भोपाल भेज दी है, जहां वह अब भी लंबित है।

DEO दे रहे ये दलील 

जिला शिक्षा अधिकारी सुजानमल मांगरिया ने बताया कि स्कूल भवन से संबंधित जानकारी विधानसभा में प्रस्तुत की जा चुकी है और ड्राइंग स्वीकृति के लिए उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। अब आगे की कार्रवाई भोपाल स्तर से होना शेष है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
Follow Us :GoogleNews