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श्मशान बना जंगल, अंतिम संस्कार से पहले ग्रामीणों को करनी पड़ी सफाई, सरपंच दे रहे ये दलील

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
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यह घटना न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत भी उजागर करती है।
श्मशान बना जंगल, अंतिम संस्कार से पहले ग्रामीणों को करनी पड़ी सफाई, सरपंच दे रहे ये दलील

cremation ground become jungle

नीमच जिले के मनासा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खेड़ी दायमा में मानवता को झकझोर देने वाली स्थिति सामने आई है जहां श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था ने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है। गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद जब परिजन एवं ग्रामीण शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे, तो वहां का दृश्य किसी जंगल से कम नहीं था।

श्मशान घाट पूरे तरह कंटीली झाड़ियों और घास से अटा पड़ा था, जिससे अंतिम संस्कार करना भी मुश्किल हो गया। हालात इतने खराब थे कि ग्रामीणों को पहले स्वयं करीब एक घंटे तक श्रम दान कर झाड़ियों की सफाई करनी पड़ी, तब जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी।

इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने पंचायत और प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान जैसे संवेदनशील स्थल की भी नियमित देखरेख नहीं की जा रही है, जिससे ऐसे हालात बन रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की नियमित देखभाल की मांग 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट की तत्काल साफ-सफाई करवाई जाए तथा भविष्य में नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी परिवार को दुःख की घड़ी में इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

श्मशान घाट की बदहाली पर सरपंच ने दी ये दलील 

इस पूरे मामले पर सरपंच गोपाल चंदेल ने कहा कि यह पहले हाड़ी पिपलिया गांव में था, उन्होंने आरोप लगाया कि  पुराने सरपंच रामकन्या बाबूलाल सेंघावत ने श्मशान घाट की जो राशि आई थी उसे निकाल कर पैसे खा गया। हालाँकि उन्होंने कहा कि इस गर्मी में यह शमशान घाट ठीक करवा दूंगा।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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