जिले में नारकोटिक्स विंग द्वारा हाल ही में की गई एक कार्रवाई अब गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है। सुथार समाज ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विभाग के अधिकारियों पर एक निर्दोष व्यक्ति को फंसाने और असली गुनहगारों को बचाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। समाज के लोगों ने एकजुट होकर रविवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और पुलिस महानिदेशक (DGP) के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
समाज का आरोप है कि पूरी कार्रवाई एक साजिश के तहत की गई, जिसका मकसद कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाना था। इस मामले को लेकर अब राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायतें भेजी गई हैं।
साजिश के तहत फंसाने का आरोप
सुथार समाज के प्रतिनिधि लक्ष्मी नारायण विश्वकर्मा ने मीडिया को बताया कि नारकोटिक्स विंग की शुरुआती जांच में कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। लेकिन, उनके अनुसार, विभाग ने मिलीभगत कर उन लोगों को मामले से बाहर कर दिया। उनकी जगह नीमच सिटी में रहने वाले निरंजन सुथार को झूठे केस में फंसा दिया गया।
ज्ञापन में साफ तौर पर निखिल, पवन और आर्यन नामक युवकों पर आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि ये तीनों निरंजन को उसकी दुकान से बुलाकर अपने साथ ले गए थे और बाद में उसे इस प्रकरण में मुख्य आरोपी बना दिया गया।
परिवार ने बताई पूरी कहानी
पीड़ित निरंजन के भाई जितेंद्र विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि उनका भाई 20 तारीख की शाम से ही लापता था। उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा था, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई थी। उन्होंने कहा, “अगले दिन हमें यह जानकारी मिली कि निरंजन नारकोटिक्स विंग की हिरासत में है। हमसे कुछ दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर भी करवाए गए।”
जितेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में जब्त की गई अफीम की मात्रा में भी हेरफेर किया गया है, ताकि केस को और संगीन बनाया जा सके।
CCTV फुटेज से खुल सकता है राज
सुथार समाज ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया है कि इस घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि अगर इन फुटेज की निष्पक्षता से जांच की जाए, तो निरंजन की बेगुनाही साफ तौर पर सामने आ जाएगी और असली साजिशकर्ता बेनकाब हो जाएंगे। समाज ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। मामले की शिकायत कलेक्टर और एसपी को भी भेजी गई है।






