अफीम नीति 2026-27 के तहत पट्टा वितरण की प्रक्रिया के बीच केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने किसानों को दलालों और बिचौलियों के चंगुल से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नीमच के उप नारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय द्वारा इस फसल सीजन के लिए अगले एक माह तक विशेष ‘सेतु हेल्पलाइन’ की शुरुआत की गई है। ‘समाधान, सुविधा और सहायता’ के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल के जरिए किसानों को चौबीसों घंटे घर बैठे पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग की ओर से जारी किए गए क्यूआर (QR) कोड और हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से किसान सीधे अधिकारियों से जुड़ सकेंगे।
समस्या, भ्रष्टाचार की शिकायत, तकनीकी मदद भी
सेतु हेल्पलाइन के माध्यम से किसानों को अफीम लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण, ऑनलाइन पंजीकरण में आने वाली तकनीकी समस्याओं और नई नीति के नियमों की तुरंत जानकारी दी जाएगी। सबसे खास बात यह है कि यदि पट्टा वितरण या किसी अन्य प्रक्रिया में कोई भ्रष्टाचार या रिश्वत की मांग करता है, तो किसान इस हेल्पलाइन पर गोपनीय रूप से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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- मोबाइल व व्हाट्सएप नंबर: 9243253787, 24 घंटे चालू इस नंबर पर किसान कॉल करने के साथ-साथ व्हाट्सएप चैट, मैसेज या व्हाट्सएप कॉल के जरिए भी जुड़ सकते हैं या क्यूआर कोड स्कैन कर सीधे संपर्क कर सकते हैं।
- लैंडलाइन नंबर: 07423-223030
- समाधान की समय-सीमा: हेल्पलाइन पर प्राप्त होने वाली किसी भी समस्या या शिकायत का निवारण यथासंभव तुरंत अथवा अधिकतम तीन (3) दिवस के भीतर किया जाएगा।
एक नजर में जानें अफीम नीति 2026-27
नारकोटिक्स उपायुक्त निखिल गांधी के अनुसार, अफीम पट्टे ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं, जिसकी सूचना CBN की आधिकारिक वेबसाइट के साथ किसानों के पंजीकृत मोबाइल और ईमेल पर भेजी जा रही है। नई अफीम नीति में इस बार बड़े बदलाव किये गए हैं।
- 1.33 लाख किसानों को पट्टा: इस फसल वर्ष में देशभर के करीब 1.33 लाख काश्तकार पात्र होंगे, जो पिछले साल की तुलना में 18 हजार अधिक हैं।
- पुराने कटे पट्टे बहाल: वर्ष 1998 से 2003 के बीच डी-लाइसेंस (पट्टा निरस्त) हुए किसानों को भी बिना चीरा लगाए पोस्ट भूसा (UPS/CPS) पद्धति में खेती का अवसर दिया गया है।
- कितना मिलेगा रकबा: चीरा लगाकर अफीम निकालने (लांसिंग) की पद्धति वाले पात्र किसानों को 0.10 हेक्टेयर (10 आरी) और बिना चीरा लगाए पोस्ट भूसा (UPS) पद्धति के लिए 0.05 हेक्टेयर (5 आरी) का लाइसेंस दिया जाएगा। किसान रकबा पूरा करने के लिए दूसरों की भूमि पट्टे पर ले सकेंगे और निर्धारित क्षेत्र से 5 प्रतिशत तक अधिक बुवाई को क्षम्य माना जाएगा।
- पात्रता के मानक: लांसिंग पद्धति में वर्ष 2025-26 के दौरान 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या उससे अधिक औसत मार्फिन देने वाले और UPS पद्धति में 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या उससे अधिक डोडा चूरा देने वाले किसान इस वर्ष पात्र होंगे। (आगामी वर्ष 2027-28 के लिए यह लक्ष्य क्रमशः 5.9 किलो मार्फिन और 900 किलो डोडा चूरा प्रति हेक्टेयर तय किया गया है)।
- 5 साल के लिए वैध हैं पट्टे: विभाग ने स्पष्ट किया है कि UPS के पट्टे 5 साल के लिए जारी किए जाते हैं और एक ही बार फीस ली जाती है। किसी वर्ष उपज कम रहने पर पट्टा केवल उस एक साल के लिए होल्ड (रोका) होता है और अगले साल स्वतः चालू हो जाता है।
- नीमच में लगेगी प्रोसेसिंग यूनिट: पोस्ट भूसे के स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रबंधन के लिए आगामी वित्तीय वर्ष में नीमच में 10 हजार मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाली आधुनिक प्रसंस्करण इकाई शुरू की जाएगी।
नई नीति की खामियों को लेकर किसानों में असंतोष भी
जहां विभाग ‘सेतु हेल्पलाइन’ और ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता का दावा कर रहा है, वहीं 42 दिन की देरी से आई इस नीति के कुछ प्रावधानों को लेकर किसानों में मायूसी भी है। किसानों का कहना है कि नीति में 5.9 से 7.2 तक की उच्च मार्फिन देने वाले उत्कृष्ट किसानों को कोई विशेष प्रोत्साहन या बढ़ा हुआ रकबा नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें भी 4.4 मार्फिन वालों के बराबर 10 आरी में ही समेट दिया गया है।
इसी तरह, CPS पद्धति में 800 किलो प्रति हेक्टेयर का उच्च औसत देने वाले किसानों को इस बार चीरा (गोंद) पद्धति में प्रमोट करने या रकबा बढ़ाने के बजाय दोबारा 5 आरी का ही CPS पट्टा दिया गया है, जिसमें लागत और मजदूरी निकालना भी मुश्किल होता है। इसके अलावा, तौल केंद्रों पर अच्छी अफीम को ‘वॉटर मिक्स’ बताकर मात्र 700 से 1,100 रुपये प्रति किलो का कम भुगतान किए जाने और खरीद मूल्य में बढ़ोतरी न होने से भी किसान नाराज हैं।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
