नीमच जिले के सकराना में एक निर्माणाधीन फैक्ट्री में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। यहां काम करने वाले एक मजदूर की तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई। आरोप है कि सुबह तबीयत खराब होने पर फैक्ट्री के जिम्मेदारों ने उसे अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई, बल्कि केवल ग्लूकोज पिलाकर छोड़ दिया। दोपहर में मजदूर की जान चली गई।
मृतक की पहचान झारखंड के पुनीपदा निवासी वंदना गोप के रूप में हुई है। वह पिछले करीब 8-9 महीने से यहां सिविल लाइन का काम कर रहा था। जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह अचानक मजदूर का जी मचलाने लगा और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बावजूद, मौके पर मौजूद ठेकेदारों और प्रबंधन ने उसे तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। उसे केवल ग्लूकोज पिला दिया गया। समय पर सही इलाज न मिलने के कारण दोपहर करीब 3 बजे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई और उसने दम तोड़ दिया।
प्रबंधन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक घटना ने फैक्ट्री मालिक और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्पष्ट है कि अगर सुबह तबीयत बिगड़ते ही मजदूर को अस्पताल ले जाया जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। बीमार मजदूर को इलाज दिलाने में इतनी देरी क्यों की गई, यह जांच का मुख्य विषय है। वहीं, जब इस पूरे मामले में कंपनी प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने पूरी तरह से चुप्पी साध ली और कोई भी जवाब देने से इनकार कर दिया।
पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही केंट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। केंट पुलिस का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस ने मृतक के परिजनों को किया सूचित
पुलिस ने झारखंड में रहने वाले मृतक के परिवार को इस दुखद हादसे की सूचना दे दी गई है। पुलिस अब विशेष रूप से इस बात की जांच कर रही है कि बीमार मजदूर को इलाज दिलाने में जानबूझकर देरी क्यों की गई। तथ्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।






