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MP का ऐसा शहर जहां मिट्टी से निकलते हैं हीरे, कहलाती है हीरों की नगरी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
विंध्य की पहाड़ियों के बीच बसा पन्ना आज भी लोगों के सपनों को चमक देता है, जहां आम मजदूर भी मिट्टी खोदते-खोदते हीरा पा सकता है। जानिए क्यों दुनिया इसे हीरों की नगरी के नाम से जानती है।
MP का ऐसा शहर जहां मिट्टी से निकलते हैं हीरे, कहलाती है हीरों की नगरी

भारत में कई शहर अपनी संस्कृति, मंदिरों या इतिहास के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन एक शहर ऐसा भी है जिसकी पहचान उसकी मिट्टी में छिपे खजाने से है। यहां खेतों और खदानों में मेहनत करने वाला साधारण इंसान भी अचानक करोड़पति बन सकता है।

हम बात कर रहे हैं मध्य भारत के उस अनोखे इलाके की, जहां जमीन की हर परत उम्मीद से भरी होती है। यहां लोग रोजाना मेहनत करते हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास होता है कि मिट्टी से निकलने वाला अगला चमकता पत्थर उनकी जिंदगी बदल सकता है।

हीरों की नगरी क्यों कहलाता है पन्ना?

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित पन्ना जिला दुनिया भर में “हीरों की नगरी” के नाम से जाना जाता है। यह भारत का इकलौता क्षेत्र है जहां प्राकृतिक रूप से जमीन से हीरे निकलते हैं।

यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के खनिज मानचित्र पर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां मिलने वाले हीरों की चमक, शुद्धता और गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान रखती है। यही वजह है कि इसे “सिटी ऑफ डायमंड” भी कहा जाता है। यहां के लोगों के लिए हीरा सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि उम्मीद और भाग्य बदलने का प्रतीक है।

विंध्य की पहाड़ियों में छिपा अनमोल खजाना

पन्ना जिला विंध्याचल पर्वतमाला के बीच बसा है। भूगर्भीय संरचना ऐसी है कि यहां की चट्टानों और मिट्टी में प्राकृतिक रूप से हीरे पाए जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि करोड़ों साल पहले भूगर्भीय गतिविधियों के कारण यहां हीरे बनने की प्रक्रिया शुरू हुई। समय के साथ यह क्षेत्र हीरा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन गया।
आज भी यहां जमीन की खुदाई के दौरान छोटे-बड़े हीरे निकलते रहते हैं, जो कभी स्थानीय मजदूरों तो कभी किसानों की जिंदगी बदल देते हैं।

एशिया की खास हीरा खदान

पन्ना जिले की कई खदानें प्रसिद्ध हैं, लेकिन सबसे खास है मझगवां की खदान, जिसे नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NMDC) संचालित करता है। यह एशिया की गिनी-चुनी ऐसी खदानों में शामिल है जहां बड़े पैमाने पर मशीनों की मदद से हीरे निकाले जाते हैं। यहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रहती है और आम लोगों का प्रवेश सीमित होता है। यह खदान देश के हीरा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आम लोग भी खोज सकते हैं हीरा

पन्ना की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि आम लोग भी हीरा खोज सकते हैं। सरकार द्वारा छोटे-छोटे प्लॉट लीज पर दिए जाते हैं। कोई भी व्यक्ति मामूली शुल्क जमा कर आवेदन कर सकता है और उसे लगभग 8×8 मीटर का क्षेत्र एक साल के लिए मिल जाता है।

इसके बाद मजदूर या किसान खुद मिट्टी खोदते हैं, सुखाते हैं, धोते हैं और कंकड़ों में चमक तलाशते हैं। कई बार महीनों मेहनत के बाद कुछ नहीं मिलता, लेकिन कई बार एक छोटा हीरा जिंदगी बदल देता है।

हीरा मिलने के बाद क्या होता है?

खदान से निकला हीरा निजी रूप से बेचना कानूनन गलत है। नियमानुसार, उसे सरकारी हीरा कार्यालय में जमा करना होता है। इसके बाद सरकार समय-समय पर नीलामी करती है। नीलामी से मिलने वाली राशि में से टैक्स और लगभग 11.5% रॉयल्टी काटकर बाकी रकम हीरा खोजने वाले व्यक्ति को दे दी जाती है। यही वजह है कि यहां लोग उम्मीद के साथ मेहनत करते रहते हैं।

कई लोगों की बदल चुकी है किस्मत

पन्ना अक्सर खबरों में रहता है क्योंकि यहां समय-समय पर लोगों को महंगे हीरे मिलते रहते हैं। कई ऐसे उदाहरण हैं जब मजदूरों को लाखों और करोड़ों की कीमत वाले हीरे मिले। ऐसे मामलों ने इस इलाके को और भी प्रसिद्ध बना दिया है। गांवों में आज भी लोग उम्मीद लेकर खदानों में काम करते हैं।

हीरों के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र

पन्ना सिर्फ हीरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य, मंदिरों और वन्यजीवों के लिए भी जाना जाता है। यहां का पन्ना टाइगर रिजर्व और केन नदी क्षेत्र भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। सरकार अब यहां पर्यटन और खनन दोनों को संतुलित तरीके से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सके।

 

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