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रेस्क्यू के बाद भी नहीं बचा बाघ, पन्ना टाइगर रिजर्व में 2 साल के टाइगर की संदिग्ध मौत

Written by:Bhawna Choubey
Published:
पन्ना टाइगर रिजर्व में ट्रेंकुलाइज कर छोड़े गए युवा बाघ की अचानक मौत ने वन विभाग को हैरान कर दिया है। एक हफ्ते पहले तक पूरी तरह स्वस्थ दिख रहा बाघ अब संदिग्ध हालात में मृत मिला, जांच तेज।
रेस्क्यू के बाद भी नहीं बचा बाघ, पन्ना टाइगर रिजर्व में 2 साल के टाइगर की संदिग्ध मौत

जंगल की शांति में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने वन विभाग से लेकर वन्यजीव प्रेमियों तक सभी को चौंका दिया है। जिस बाघ को कुछ दिन पहले ही सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया था, वही अब मृत मिला है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक स्वस्थ दिखने वाला बाघ सिर्फ एक हफ्ते में मौत का शिकार हो गया?

यह मामला सिर्फ एक बाघ की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे संरक्षण तंत्र पर सवाल खड़े करता है। जब किसी बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया जाता है, तो उसकी पूरी निगरानी होती है। ऐसे में उसकी अचानक मौत कई नई शंकाएं पैदा कर रही है।

रेस्क्यू के बाद भी क्यों नहीं बच पाया बाघ?

जानकारी के मुताबिक, यह करीब दो साल का बाघ था जिसे 26 अप्रैल को एक गांव के पास देखा गया था। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने उसे ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित तरीके से पकड़ा और मेडिकल जांच के बाद जंगल के कोर एरिया में छोड़ दिया।

रेस्क्यू के दौरान बाघ पूरी तरह स्वस्थ बताया गया था। उसे रेडियो कॉलर भी पहनाया गया था ताकि उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। शुरू में सब कुछ सामान्य लग रहा था। बाघ जंगल में घूम रहा था और उसकी लोकेशन भी ट्रैक हो रही थी।

लेकिन अचानक कुछ दिन बाद उसकी गतिविधियां रुक गईं। जब टीम मौके पर पहुंची तो बाघ मृत मिला। यह स्थिति चौंकाने वाली थी, क्योंकि बाघ के शरीर पर किसी बाहरी हमले के निशान नहीं मिले।

मौत के पीछे क्या हो सकती हैं वजहें?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाघ की मौत कैसे हुई? फिलहाल कई संभावनाओं पर जांच चल रही है। पहली संभावना यह है कि ट्रेंकुलाइज के दौरान इस्तेमाल की गई दवा का असर देर से पड़ा हो। कई बार ऐसा होता है कि दवा का साइड इफेक्ट बाद में सामने आता है, जिससे जानवर की तबीयत बिगड़ सकती है।

दूसरी संभावना स्वास्थ्य से जुड़ी हो सकती है। हो सकता है कि बाघ के शरीर में पहले से कोई अंदरूनी बीमारी रही हो, जो जांच में सामने नहीं आई। जंगल में छोड़े जाने के बाद वह बीमारी गंभीर हो गई हो।

तीसरी संभावना पर्यावरण से जुड़ी है। नए इलाके में छोड़े जाने के बाद बाघ को भोजन या पानी मिलने में परेशानी हुई हो, जिससे उसकी हालत खराब हो गई हो।हालांकि, अभी तक इन सभी कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। असली वजह पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी।

रेडियो कॉलर और मॉनिटरिंग पर उठे सवाल

इस मामले में एक और बड़ा मुद्दा सामने आया है मॉनिटरिंग सिस्टम की प्रभावशीलता। जब बाघ को रेडियो कॉलर पहनाया गया था, तो उसकी हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही थी। लेकिन सवाल यह है कि अगर बाघ की हालत खराब हो रही थी, तो क्या उसकी जानकारी समय रहते मिल पाई? क्या सिस्टम में कोई चूक हुई?

विशेषज्ञ मानते हैं कि रेडियो कॉलर सिर्फ लोकेशन बताता है, लेकिन यह स्वास्थ्य की पूरी जानकारी नहीं देता। ऐसे में अगर बाघ बीमार हो जाए, तो उसे समय पर बचाना मुश्किल हो सकता है।

वन्यजीव संरक्षण पर असर

यह घटना सिर्फ एक बाघ की मौत नहीं है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को भी उजागर करती है। बाघ जैसे संवेदनशील जानवरों को बचाने के लिए सिर्फ रेस्क्यू करना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके बाद की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।

आज देश में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि अभी भी सिस्टम में सुधार की जरूरत है। खासतौर पर ट्रेंकुलाइज और रिलोकेशन जैसी प्रक्रियाओं में ज्यादा सावधानी बरतनी होगी, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

जांच पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल वन विभाग ने बाघ के शव को सुरक्षित रख लिया है और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि बाघ के शरीर में कोई जहर तो नहीं था, कोई अंदरूनी चोट तो नहीं थी, या फिर कोई बीमारी तो नहीं थी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि बाघ की मौत के पीछे असली वजह क्या थी।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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