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रायसेन में नरवाई की आग का कहर! आंधी-तूफान में गांव तक पहुंची लपटें, घर-ट्रैक्टर जले

Written by:Bhawna Choubey
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रायसेन नरवाई आग हादसे में तेज आंधी-तूफान ने हालात बिगाड़ दिए, खेतों से उठी आग गांव तक पहुंची, कई घर जले, पशुओं की मौत हुई किसानों की मेहनत राख में बदली, प्रशासन ने राहत का भरोसा दिया।
रायसेन में नरवाई की आग का कहर! आंधी-तूफान में गांव तक पहुंची लपटें, घर-ट्रैक्टर जले

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में शनिवार का दिन कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। खेतों में जलाई गई नरवाई अचानक तेज आंधी-तूफान के साथ भड़क उठी और देखते ही देखते आग गांव तक पहुंच गई। कुछ ही मिनटों में हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

आलमखेड़ा गांव में आग का यह मंजर इतना भयानक था कि घर, अनाज, पशु और खेती के उपकरण सब कुछ जलकर खाक हो गया। लोग अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को राख में बदलते देखते रह गए। इस रायसेन नरवाई आग हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर खेतों में आग लगाने की यह परंपरा कब तक जानलेवा बनती रहेगी।

आंधी-तूफान बना आग का सबसे बड़ा कारण

रायसेन नरवाई आग की इस घटना में सबसे बड़ा रोल मौसम का रहा। शनिवार शाम करीब 4 बजे अचानक मौसम बदला और तेज आंधी-तूफान के साथ धूल भरी हवाएं चलने लगीं। खेतों में पहले से जल रही नरवाई की आग इन हवाओं के साथ तेजी से फैलने लगी।

ग्रामीणों के मुताबिक, हवा इतनी तेज थी कि आग ने कुछ ही मिनटों में दिशा बदल ली और सीधे गांव की ओर बढ़ गई। धुएं और धूल के कारण लोगों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। कई लोगों ने बताया कि हालत ऐसी हो गई थी कि वे एक-दूसरे को पहचान तक नहीं पा रहे थे।

घर, ट्रैक्टर और पशु सब कुछ जलकर खाक

आलमखेड़ा गांव में इस आग ने भारी तबाही मचाई। कई घर पूरी तरह जल गए और लोगों के पास रहने तक की जगह नहीं बची। एक किसान का ट्रैक्टर, जो उसके आंगन में खड़ा था, आग की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो गया।

इस हादसे में करीब 4 पशुओं की जलकर मौत हो गई, जो किसानों के लिए किसी बड़े नुकसान से कम नहीं है। इसके अलावा करीब 12 किसानों का 100 क्विंटल से ज्यादा गेहूं और कृषि उपकरण भी जलकर राख हो गए।

ग्रामीणों ने दिखाई हिम्मत, खुद बुझाई आग

जब आग गांव तक पहुंची, तो शुरुआती समय में कोई सरकारी मदद तुरंत नहीं पहुंच पाई। ऐसे में गांव के लोगों ने खुद ही मोर्चा संभाला। ग्रामीणों ने एकजुट होकर पानी, मिट्टी और अन्य साधनों से आग बुझाने की कोशिश की।

हालांकि, इस दौरान कई लोग झुलस भी गए। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे। काफी देर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस रायसेन नरवाई आग हादसे में ग्रामीणों की एकजुटता ने बड़ी भूमिका निभाई। अगर लोग समय रहते कोशिश नहीं करते, तो नुकसान और भी ज्यादा हो सकता था।

प्रशासन पहुंचा मौके पर, मुआवजे का आश्वासन

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने नुकसान का जायजा लिया और हर संभव मदद का भरोसा दिया।

प्रशासन ने कहा कि प्रभावित किसानों और परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा और राहत पहुंचाई जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें जल्द से जल्द मदद की जरूरत है।

नरवाई जलाने की परंपरा बनी खतरा

मध्य प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली या नरवाई को जलाना आम बात है। किसान इसे जल्दी खेत साफ करने का आसान तरीका मानते हैं। लेकिन यह तरीका अब लगातार खतरनाक साबित हो रहा है। रायसेन नरवाई आग हादसा इसका ताजा उदाहरण है। हर साल इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें कभी खेत जलते हैं तो कभी गांव तक आग पहुंच जाती है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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