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अशोक गहलोत की ‘इंतजार शास्त्र’ सीरीज पर बीजेपी-कांग्रेस में घमासान, आरोप-प्रत्यारोप से सियासी पारा चढ़ा

Written by:Ankita Chourdia
Published:
राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 'इंतजार शास्त्र' सीरीज को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। दरअसल बीजेपी इसे 'राजनीतिक ड्रामा' बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे जनता के लंबे समय से लंबित मुद्दों की आवाज बता रही है।
अशोक गहलोत की ‘इंतजार शास्त्र’ सीरीज पर बीजेपी-कांग्रेस में घमासान, आरोप-प्रत्यारोप से सियासी पारा चढ़ा

राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सोशल मीडिया पर शुरू की गई ‘इंतजार शास्त्र’ सीरीज ने इन दिनों राज्य की सियासत को गरमा दिया है। दरअसल एक ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस अभियान को ‘राजनीतिक ड्रामा’ बता रही है, तो वहीं कांग्रेस इसे आम जनता के लंबे समय से अटके मुद्दों को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण मंच बता रही है और उसका बचाव कर रही है। दोनों प्रमुख दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी जारी है, जिससे राज्य का सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है और जनता भी इस सियासी खींचतान को दिलचस्पी से देख रही है।

दरअसल अशोक गहलोत का इस सीरीज को शुरू करने के पीछे साफ मकसद यह बताया जा रहा है कि वह राजनीति से ऊपर उठकर जनता के उन महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना चाहते हैं जो लंबे समय से सरकारी फाइलों में अटके हुए हैं। उनके अनुसार प्रदेश में ऐसी कई परियोजनाएं, विकास कार्य और प्रशासनिक मामले हैं जिनकी वजह से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी कई छोटी-बड़ी परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं, जिनके पूरा न होने से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। गहलोत का मानना है कि जब किसी काम के लिए जनता का इंतजार बहुत ज्यादा लंबा हो जाता है और लोगों को राहत नहीं मिलती, तब ऐसे मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर सामने लाना जरूरी हो जाता है। इसी सोच के साथ उन्होंने इस अभियान को ‘इंतजार शास्त्र’ नाम दिया है। उनका तर्क है कि अगर मौजूदा सरकार इन लंबित मुद्दों पर प्राथमिकता के साथ काम करे और गति बढ़ाए, तो लोगों को जल्द राहत मिल सकती है और सरकार पर विश्वास भी मजबूत हो सकता है।

बीजेपी का आरोप: सुर्खियों में बने रहने की कवायद

वहीं दूसरी ओर बीजेपी इस पूरे मामले को गहलोत की राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रही है। पार्टी का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी ही पार्टी कांग्रेस में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर कम होती भूमिका और नई सरकार के सामने खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए वह सोशल मीडिया के जरिए सुर्खियों में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवारी ने गहलोत के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है,

दरअसल घनश्याम तिवारी का कहना है कि “गहलोत जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, उनमें कई बातें गलत और भ्रामक हैं। ‘शास्त्र’ जैसे गंभीर और महत्वपूर्ण शब्द का इस्तेमाल इस तरह के राजनीतिक अभियानों के लिए करना भी ठीक नहीं है, इससे इसकी गरिमा कम होती है। हम इसे केवल एक राजनीतिक ड्रामा मानते हैं।”

तिवारी ने साफ कहा है कि बीजेपी गहलोत के इस ‘इंतजार शास्त्र’ अभियान को जनता की समस्याओं का समाधान करने की बजाय अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और विपक्ष में रहकर सरकार पर दबाव बनाने का एक तरीका मानती है। बीजेपी का कहना है कि सरकार बनने के बाद से विकास कार्यों में तेजी आई है और लंबित पड़े मामलों को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

कांग्रेस का पलटवार: सरकार गहलोत के अनुभव का लाभ उठाए

बीजेपी के इन आरोपों पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बीजेपी नेताओं की भाषा और आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना बताया है। डोटासरा ने कहा है,

“अशोक गहलोत जैसे अनुभवी और वरिष्ठ नेता के खिलाफ इस तरह की हल्की और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना गलत है। सरकार को चाहिए कि वह गहलोत के लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाए, बजाय उन पर निजी हमले करने के।” (गोविंद सिंह डोटासरा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)

उन्होंने यह भी कहा है कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को खुद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात करनी चाहिए और इन मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए। डोटासरा ने कहा है कि अगर गहलोत द्वारा उठाए गए आरोप गलत हैं, तो सरकार को ठोस तथ्यों और पुख्ता सबूतों के साथ उन्हें सार्वजनिक रूप से खारिज करना चाहिए, केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि गहलोत जनता के बीच से आ रही समस्याओं को सामने ला रहे हैं और सरकार को इसे सकारात्मक रूप से लेते हुए समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।

Ankita Chourdia
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