इंदौर के प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर में मंगलवार को 80 हजार से ज्यादा भक्तों के लिए विशेष चलित भंडारे का आयोजन हो रहा है। ;दरअसल हनुमान जन्मोत्सव के बाद आने वाले पहले मंगलवार को होने वाले इस भंडारे में श्रद्धालु पूड़ी, नुक्ती, भजिए और रामभाजी का प्रसाद पा सकेंगे। वहीं मंदिर प्रबंधन ने इस बार की व्यवस्था पूरी तरह से चलित रखी है। इसका मतलब है कि भक्तों को पैकेट में प्रसाद वितरित किया जा रहा है, जिसे वे अपने साथ घर भी ले जा सकते हैं। यह खास इंतजाम भक्तों की सुविधा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के प्रसाद ग्रहण कर सकें।
दरअसल यह भंडारा दशकों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। हर साल हनुमान जन्मोत्सव के अगले मंगलवार को रणजीत हनुमान मंदिर में बड़े पैमाने पर भंडारे का आयोजन होता है। पहले मंदिर परिसर के ग्राउंड में भक्तों को बैठाकर प्रसाद परोसा जाता था। हालांकि समय के साथ भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे भीड़ को संभालना और व्यवस्था बनाना एक चुनौती बन गया है। बढ़ती भीड़ और व्यवस्था संबंधी चुनौतियों को देखते हुए पिछले कुछ सालों से इस पारंपरिक स्वरूप में बदलाव किया गया है। अब इसे पूरी तरह से चलित भंडारे का रूप दे दिया गया है, ताकि भक्तों को सुविधा हो और वितरण प्रक्रिया तेज हो सके। यह बदलाव आधुनिक व्यवस्थापन और भक्तों की सुविधा के प्रति मंदिर प्रबंधन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
लंबी कतारों में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा
चलित भंडारे की व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भक्तों को प्रसाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। पारंपरिक रूप से बैठकर प्रसाद ग्रहण करने में जहां ज्यादा समय लगता था और लंबी लाइनें लग जाती थीं, वहीं चलित व्यवस्था से यह प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी। मंदिर प्रबंधन ने महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग पंक्तियों की व्यवस्था की है। इससे भीड़ को नियंत्रित करना आसान होगा और सभी को सुगमता से प्रसाद मिल सकेगा। वहीं इस व्यवस्था से भक्तों का इंतजार कम होगा और वे जल्द से जल्द प्रसाद लेकर आगे बढ़ सकेंगे। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि इससे समय की बचत हो रही है और ज्यादा भक्त इसका लाभ उठा पा रहे हैं, जिससे उनका आध्यात्मिक अनुभव भी बेहतर हो रहा है।
जानिए कैसी रहेगी व्यवस्था?
प्रसाद वितरण की प्रक्रिया भी काफी व्यवस्थित और नई है। भक्त जब लाइन में आगे बढ़ते हुए परिसर में प्रवेश कर सकेंगे, तो उन्हें एक प्लेट वाला विशेष पैकेट दिया जाएगा। वहीं यह पैकेट इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें सभी प्रसाद सामग्री आसानी से रखी जा सके। इसके बाद भक्त अलग-अलग काउंटरों से पूड़ी, रामभाजी, नुक्ती और भजिए का प्रसाद अपने प्लेट वाले पैकेट में प्राप्त कर रहे हैं। इन पैकेटों पर एक सुरक्षित ढक्कन भी लगाया गया है। यह ढक्कन भक्तों को प्रसाद को सुरक्षित रूप से पैक करके अपने घर ले जाने की सुविधा दे रहा है, जिससे प्रसाद रास्ते में खराब न हो या गिरे नहीं। जो भक्त घर नहीं ले जाना चाहते, वे बाहर खड़े होकर भी इसका आनंद ले सकते हैं। यह सुविधा उन भक्तों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो दूर से आते हैं और प्रसाद को अपने परिवार के साथ साझा करना चाहते हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दीपेश व्यास ने इस आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि इस बार भंडारे में आने वाले भक्तों और केवल बाबा के दर्शन करने आने वाले भक्तों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि दोनों तरह के श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और मंदिर परिसर में शांति और व्यवस्था बनी रहे। वर्तमान में मंदिर में रणजीत लोक का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके चलते मंदिर का मुख्य गेट सामान्य दिनों में बंद रहता है। हालांकि भंडारे के विशेष अवसर पर भक्तों की सुविधा के लिए मुख्य गेट को खोल दिया गया है। इससे दर्शनार्थी सीधे मुख्य गेट से आकर दर्शन कर पा रहे हैं और वापस लौट रहे हैं, जबकि भंडारे में शामिल होने वाले भक्त मंदिर परिसर के ग्राउंड में प्रवेश कर पा रहे हैं। इस तरह भक्तों के बीच किसी भी तरह की उलझन या भीड़भाड़ से बचा जा रहा है और सभी अपनी आस्था के अनुसार दर्शन और प्रसाद ग्रहण कर पा रहे हैं।
इस विशाल भंडारे के लिए प्रसाद तैयार करने की तैयारियां भी बड़े पैमाने पर की गई हैं। लगभग 80 हजार भक्तों के लिए भोजन प्रसादी तैयार की जा रही है, जिसके लिए भारी मात्रा में सामग्री का उपयोग हो रहा है। पंडित व्यास के अनुसार इस विशाल भंडारे के लिए 80 क्विंटल आटे का इस्तेमाल पूड़ी बनाने में किया जा रहा है। इसके अलावा 15 क्विंटल बेसन का उपयोग नुक्ती और भजिए बनाने के लिए किया जा रहा है, जो भंडारे के मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं। शुद्धता और स्वाद का विशेष ध्यान रखते हुए 90 डिब्बे शुद्ध घी और 200 डिब्बे मूंगफली के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोमवार को भट्टी पूजन के साथ ही नुक्ती बनाने का काम शुरू कर दिया गया है, जिससे मंगलवार तक सभी प्रसाद सामग्री गुणवत्ता के साथ तैयार हो सके। यह सारी व्यवस्था हजारों भक्तों की आस्था और सेवा के भाव को दर्शा रही है, जिसे मंदिर समिति और स्वयंसेवकों के सहयोग से संभव बनाया जा रहा है।






