Hindi News

राजस्थान के रावतसर में शिक्षकों की LPG वितरण निगरानी में ड्यूटी का आदेश रद्द, विवाद बढ़ने पर सरकार का हस्तक्षेप, जानें पूरा विवाद

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में एसडीएम द्वारा शिक्षकों को रसोई गैस वितरण की निगरानी के लिए नियुक्त करने का आदेश विवादों में घिर गया। शिक्षक संगठनों के विरोध और नेता प्रतिपक्ष के तीखे बयानों के बाद राज्य सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए इस आदेश को रद्द कर दिया है।
राजस्थान के रावतसर में शिक्षकों की LPG वितरण निगरानी में ड्यूटी का आदेश रद्द, विवाद बढ़ने पर सरकार का हस्तक्षेप, जानें पूरा विवाद

जयपुर/हनुमानगढ़: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एक उपखंड अधिकारी (SDO) द्वारा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य में लगाने का आदेश जारी करना सरकार के लिए गले की फांस बन गया। मामला रावतसर उपखंड का है, जहां शिक्षकों की ड्यूटी रसोई गैस (LPG) वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए लगा दी गई थी। जैसे ही यह आदेश सार्वजनिक हुआ, शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया और विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा। बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप किया और इस आदेश को निरस्त कर दिया।

यह पूरा मामला रावतसर के उपखंड अधिकारी द्वारा जारी एक निर्देश से शुरू हुआ। देशभर में एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं का हवाला देते हुए, आमजन को असुविधा से बचाने के लिए तहसीलदार कार्यालय में एक ‘एलपीजी निगरानी एवं समन्वय केंद्र’ (कंट्रोल रूम) स्थापित करने का निर्णय लिया गया था।

क्या था विवादित आदेश में?

एसडीएम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस कंट्रोल रूम के संचालन और गैस वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए तीन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। उन्हें 14 मार्च 2026 से अपने निर्धारित दायित्वों पर उपस्थित होने के लिए कहा गया था। इन शिक्षकों का काम गैस वितरण की निगरानी करना और इससे जुड़ी शिकायतों का निस्तारण करना था।

यह आदेश सामने आते ही शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी फैल गई। उनका तर्क था कि वर्तमान में बोर्ड परीक्षाओं के कारण शिक्षकों पर पहले से ही परीक्षा ड्यूटी और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का भारी दबाव है। ऐसे में उन्हें एक और गैर-शैक्षणिक कार्य में लगाना पूरी तरह अनुचित है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

मामले ने जल्द ही राजनीतिक तूल पकड़ लिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरी सरकार का बोझ सरकारी शिक्षकों के कंधों पर डाल दिया गया है।

“एलपीजी की सप्लाई सरकार नहीं कर पा रही और अब आमजन के आक्रोश का सामना शिक्षकों को करना पड़ सकता है।”- टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष

जूली ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों को पहले भी कई तरह के गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता रहा है। उन्होंने कहा, “कभी शिक्षकों को एसआईआर जैसी ड्यूटी में लगाया जाता है, कभी विद्यालयों से कुत्ते भगाने जैसे कार्य दिए जाते हैं और अब गैस वितरण से जुड़े कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी जा रही है।”

सरकार का हस्तक्षेप और आदेश निरस्त

शिक्षक संगठनों के विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद मामला राज्य सरकार के संज्ञान में आया। विवाद को बढ़ता देख सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप किया और रावतसर के उपखंड अधिकारी द्वारा जारी किए गए इस आदेश को निरस्त करने के निर्देश दिए। आदेश रद्द होने के बाद शिक्षक संगठनों ने राहत की सांस ली और एक बार फिर यह मांग दोहराई कि शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
Follow Us :GoogleNews