राजस्थान की 16वीं विधानसभा के सत्र में आमतौर पर बिजली, पानी और सड़क जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, लेकिन 2 फरवरी को एक ऐसी समस्या पर सदन का ध्यान खींचा गया, जिससे कई इलाकों के लोग बुरी तरह त्रस्त हैं। शाहपुरा से कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने अपने क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक का मामला उठाया, जिसने सदन में मौजूद अधिकांश सदस्यों का समर्थन हासिल किया।
विधायक मनीष यादव ने सरकार को बताया कि शाहपुरा में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोग अपने घरों को छोड़ने और पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने इस समस्या की गंभीरता को आंकड़ों के माध्यम से सदन के सामने रखा, जो बेहद चौंकाने वाले हैं।
आंकड़े जो बयां करते हैं आतंक की कहानी
मनीष यादव ने दावा किया कि आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र में रेबीज के लगभग 4200 टीके लगाए गए। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से करीब 90 प्रतिशत टीके बंदरों द्वारा काटे जाने के बाद लोगों को लगाने पड़े। यह आंकड़ा क्षेत्र में बंदरों के हमलों की भयावहता को दर्शाता है। विधायक ने जोर देकर कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और आजीविका से भी जुड़ा है।
इस गंभीर मुद्दे पर शहरी विकास और आवास (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सरकार की ओर से जवाब दिया। उन्होंने विधायक को आश्वासन दिया कि विभाग इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है और की जा रही कार्रवाई की जानकारी भी सदन को दी।
किसानों की फसलें भी हो रहीं बर्बाद
बंदरों का आतंक सिर्फ इंसानों पर हमलों तक ही सीमित नहीं है। शाहपुरा क्षेत्र के किसान भी इस समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। बंदरों के झुंड खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को नष्ट कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लगातार हो रहे नुकसान के कारण कई किसान परिवार भी हताश हैं।
इसी सत्र के दौरान 23 फरवरी को एक अन्य मामले में खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर ने भी आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या को उठाया था। उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा था कि कुत्तों के आतंक के कारण बच्चों और आम लोगों का बाजारों और मोहल्लों से निकलना मुश्किल हो गया है।






