राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सचिन पायलट ने भजनलाल शर्मा की सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर चुनाव कराने में देरी कर रही है। पायलट का कहना है कि अदालत ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की समयसीमा तय की थी, लेकिन इसके बावजूद चुनाव नहीं कराए गए। उनके मुताबिक यह सब हार के डर से किया जा रहा है और इससे जमीनी स्तर पर लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।
सोमवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान सचिन पायलट ने कहा कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को टालना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव ही नहीं होंगे तो लोगों को अपनी बात रखने का मौका कैसे मिलेगा। शहरों और गांवों में फिलहाल प्रशासक नियुक्त हैं, लेकिन वे लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को प्रभावी तरीके से हल नहीं कर पा रहे हैं।
स्थानीय चुनावों में देरी चिंता का विषय: सचिन पायलट
पायलट ने कहा कि देश के कई राज्यों में स्थानीय चुनावों में देरी चिंता का विषय है, लेकिन राजस्थान की स्थिति ज्यादा गंभीर है। उनके मुताबिक आम धारणा यह बन रही है कि सरकार चुनाव कराने से बच रही है क्योंकि उसे नतीजों का डर है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार अलग-अलग कारण बताकर चुनाव टाले जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में बीजेपी सरकार बनने के बाद से छात्रसंघ, नगर निकाय और पंचायत संस्थाओं के चुनाव नहीं कराए गए हैं। कांग्रेस लगातार इन चुनावों को जल्द कराने की मांग कर रही है, लेकिन सरकार इस मांग को नजरअंदाज कर रही है।
केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा
सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) राजस्थान में लगभग ठप पड़ गई है और पूरे देश में इस योजना को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में वे गए, वहां मनरेगा का काम लगभग बंद पड़ा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए पर्याप्त धन नहीं दे रही है। उनका कहना था कि सरकार का ध्यान वास्तविक काम की बजाय विज्ञापनों के जरिए अपनी छवि चमकाने पर ज्यादा है। उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बजट में चार लाख नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन अब तक यह साफ नहीं है कि वास्तव में कितने लोगों को रोजगार मिला है।
उनके मुताबिक ग्रामीण इलाकों में विकास की रफ्तार धीमी हो गई है और युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। पायलट ने कहा कि सरकार घोषणाएं तो करती है, लेकिन उन्हें जमीन पर लागू करने में नाकाम रहती है।






