राजस्थान में मानसून से पहले जर्जर स्कूल भवनों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने राज्य के सभी पुराने और कमजोर स्कूल भवनों की मरम्मत कराने के आदेश जारी किए हैं। सरकार का उद्देश्य यह है कि बरसात के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके और उन्हें बेहतर तथा सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
दरअसल पिछले साल झालावाड़ में एक दर्दनाक हादसा हुआ था, जिसमें एक स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी और कई बच्चे घायल हो गए थे। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और सरकारी स्कूलों की भवन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब मानसून से पहले जर्जर और मरम्मत योग्य स्कूल भवनों की पहचान कर उन्हें ठीक कराने के निर्देश दिए हैं।
समय-सीमा तय कर मरम्मत कराने के निर्देश
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी कमजोर ढांचों का सर्वे कराया जाए और उनकी समय-सीमा तय कर मरम्मत कराई जाए। जहां भवन बहुत ज्यादा जर्जर या असुरक्षित पाए जाते हैं और उनकी मरम्मत संभव नहीं है, वहां नए स्कूल भवन बनाने की योजना तैयार कर उसे तुरंत लागू करने के लिए कहा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी छात्र को असुरक्षित भवन में पढ़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।
बैठक में स्कूली शिक्षा से जुड़ी कई योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसमें समग्र शिक्षा अभियान, पीएम-श्री योजना, फ्री यूनिफॉर्म डीबीटी, आईसीटी लैब, टैबलेट वितरण और ज्ञान संकल्प पोर्टल जैसी योजनाएं शामिल रहीं। इन योजनाओं का उद्देश्य छात्रों को बेहतर सुविधाएं देना और शिक्षा में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है।
मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की गई
इसके अलावा राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक बोर्ड, राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय और मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी योजनाओं का लाभ समय पर छात्रों तक पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। सरकार ने साफ कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और राज्य में किसी भी छात्र को जर्जर या असुरक्षित स्कूल भवन में पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी।






