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पश्चिम बंगाल कोयला घोटाला मामले में ED का बड़ा एक्शन, I-PAC के निदेशक विनेश चंदेल को किया गिरफ्तार

Written by:Gaurav Sharma
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के निदेशक विनेश चंदेल को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। चंदेल पर पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। ईडी का दावा है कि करोड़ों रुपये का काला धन हवाला के जरिए आई-पैक के खातों तक पहुंचा।
पश्चिम बंगाल कोयला घोटाला मामले में ED का बड़ा एक्शन, I-PAC के निदेशक विनेश चंदेल को किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की गहमागहमी के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। चंदेल की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में हुई है। उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित ‘कोयला घोटाले’ से जुड़े मामले में पकड़ा गया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब आई-पैक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनावी अभियान में अहम भूमिका निभा रही है। एक शीर्ष चुनावी रणनीतिकार कंपनी के प्रमुख अधिकारी की गिरफ्तारी ने बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया है और इसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

कौन हैं विनेश चंदेल?

विनेश चंदेल आई-पैक के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और इस राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म के संस्थापकों में शामिल हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर इस कंपनी की नींव रखी थी। आई-पैक पिछले कई सालों से देश के विभिन्न राज्यों में राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीतियाँ तैयार करती रही है। पश्चिम बंगाल में, चंदेल कंपनी के रणनीतिक संचालन के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस के चुनाव अभियान के प्रबंधन में बेहद अहम भूमिका निभा रहे थे। वह टीएमसी के चुनावी रोडमैप को आकार देने और जमीनी स्तर पर पार्टी के प्रचार को मजबूत करने का काम देख रहे थे। उनकी गिरफ्तारी से टीएमसी की चुनावी तैयारियों को बड़ा झटका लग सकता है।

कोयला घोटाला मामले में विनेश चंदेल की गिरफ्तारी

ईडी अधिकारियों के मुताबिक, विनेश चंदेल की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है, जो सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कोयला चोरी और तस्करी से करोड़ों रुपये का काला धन इकट्ठा किया गया था। इस काले धन को ‘हवाला’ ऑपरेटरों के एक जटिल नेटवर्क के जरिए आई-पैक की कंपनी इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के खातों तक पहुंचाया गया। ईडी का दावा है कि ये लेनदेन चुनावी फंडिंग के तौर पर इस्तेमाल किए गए थे, जिससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था।

यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम है क्योंकि यह वही आई-पैक है जिसके कोलकाता दफ्तर पर इसी साल जनवरी में ईडी ने छापेमारी की थी। उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गई थीं। इस घटना ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ने एजेंसी की कार्रवाई के बीच कुछ अहम फाइलें वहां से निकलवा ली थीं, जिससे जांच प्रभावित हुई। हालांकि, राज्य सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन यह घटना जांच एजेंसियों की स्वायत्तता और उनके काम में कथित सरकारी हस्तक्षेप को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है।

इस मामले में ईडी ने कई जगहों पर की थी छापेमारी

ईडी ने इस मामले में सिलसिलेवार तरीके से कई जगहों पर छापेमारी की है। दिल्ली में चंदेल के परिसर के अलावा, बेंगलुरु में आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक और निदेशक ऋषि राज सिंह के परिसर पर 2 अप्रैल को ईडी ने छापा मारा था। उसी दिन मुंबई में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता विजय नायर के परिसर पर भी छापेमारी की गई। विजय नायर का नाम दिल्ली शराब नीति घोटाले से भी जुड़ा रहा है, जिससे इस मामले की परतें और गहरी होती दिख रही हैं। इससे पहले, 8 जनवरी को ईडी ने आई-पैक के कोलकाता स्थित कार्यालय और इसके संस्थापक व निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के आवास पर भी गहन तलाशी अभियान चलाया था। ये सभी छापे ईडी की व्यापक जांच का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करना है।

ईडी का यह पूरा मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की नवंबर 2020 की प्राथमिकी पर आधारित है। सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में पश्चिम बंगाल के आसनसोल और उसके आसपास के कुनुस्तोरिया और काजोरा क्षेत्रों में स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से संबंधित कई करोड़ रुपये के कोयला चोरी घोटाले का आरोप लगाया था। यह घोटाला अवैध कोयला खनन, उसकी तस्करी और उससे जनरेट हुए काले धन के बड़े नेटवर्क से जुड़ा है। कोयले की चोरी और उसे खुले बाजार में बेचने से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ है। सीबीआई की जांच में कई अधिकारी, राजनेता और स्थानीय माफिया भी शामिल पाए गए थे, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू की।

ईडी का दावा- हवाला नेटवर्क की जटिलता और अन्य घोटालों से कनेक्शन

ईडी का दावा है कि इस कोयला घोटाले से जुड़े हवाला ऑपरेटरों ने आई-पैक की पंजीकृत कंपनी इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड तक करोड़ों रुपये पहुंचाए। एजेंसी के अनुसार, लगभग 20 करोड़ रुपये इस हवाला नेटवर्क के जरिए आई-पैक तक पहुंचे थे। यह पैसा विभिन्न चरणों में ट्रांसफर किया गया, ताकि इसका मूल स्रोत छुपाया जा सके। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन पैसों को मुंबई की एक ‘अंगड़िया फर्म’ के जरिए ट्रांसफर किया गया था। यह अंगड़िया फर्म पहले दिल्ली शराब घोटाले की जांच में भी केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आ चुकी है। इस कनेक्शन से पता चलता है कि हवाला नेटवर्क कितना व्यापक और जटिल है और कैसे यह विभिन्न घोटालों में काले धन की आवाजाही में शामिल रहा है। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क के मूल तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि सभी दोषियों को पकड़ा जा सके।

आई-पैक, जैसा कि सर्वविदित है, तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाली सबसे प्रमुख कंपनियों में से एक है। ऐसे में उसके शीर्ष निदेशक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह कार्रवाई टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। विपक्षी दल, खासकर भाजपा और कांग्रेस, इस मौके को भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे ताकि टीएमसी को घेर सकें। यह गिरफ्तारी निश्चित रूप से चुनावी माहौल को और गरमाएगी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होगा। अब देखना यह है कि ईडी की जांच आगे क्या खुलासे करती है और इसका बंगाल के चुनावी समीकरणों पर क्या गहरा असर पड़ता है।

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