AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रघुनाथगंज विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। ओवैसी ने दोनों नेताओं को ‘एक ही सिक्के के दो पहलू’ बताते हुए कहा कि पीएम मोदी और ममता भाई-बहन जैसे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं।
ओवैसी का यह आरोप तृणमूल कांग्रेस द्वारा एक्स पर एक स्टिंग वीडियो पोस्ट किए जाने के बाद सामने आया है। इस वीडियो में AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर कथित तौर पर 1000 करोड़ रुपये के सौदे की बात करते दिख रहे थे। AIMIM ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे मुसलमानों की ईमानदारी पर सवाल उठे हैं। इसी घटना के बाद AIMIM ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन भी वापस ले लिया था। ओवैसी ने अपनी सभा में कहा कि मजलिस बंगाल के मुसलमानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगी।
ममता बनर्जी पर झूठ बोलने लगाया आरोप
असदुद्दीन ओवैसी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने यह दावा किया था कि वे बंगाल में वक्फ एक्ट लागू नहीं करेंगी, लेकिन उन्होंने सिर्फ मुसलमानों के वोट हासिल करने के लिए झूठ बोला। ओवैसी ने सवाल किया कि क्या ममता बनर्जी ने भाजपा का साथ नहीं दिया है, जिससे उनके भाई-बहन जैसे संबंध और भी पुख्ता होते हैं।
AIMIM प्रमुख ने पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के साथ गंभीर अन्याय और भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय पर गंभीर अन्याय किया गया है। ओवैसी ने यह भी कहा कि लोग अक्सर मुसलमानों से सेकुलरिज्म के साथ खड़े रहने को कहते हैं, लेकिन उनके अपने हितों पर गंभीर चोट पहुंचाई जा रही है।
ओवैसी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि क्या यह सच नहीं है कि जब पंडित जवाहरलाल नेहरू इस देश के प्रधानमंत्री थे, तब इसी बंगाल से लगभग 40,000 मुसलमानों को नोटिस दिए गए थे या उन्हें यहां से निर्वासित कर दिया गया था? यह दावा राज्य में मुसलमानों के साथ लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव की ओर इशारा करता है।
मुसलमानों के साथ हुए हालिया अन्याय का एक और बड़ा उदाहरण देते हुए ओवैसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल कलकत्ता हाईकोर्ट ने 5 लाख ओबीसी प्रमाणपत्र रद्द कर दिए थे। इन रद्द किए गए प्रमाणपत्रों में से 3,50,000 प्रमाणपत्र मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के थे। ओवैसी ने इस आंकड़े को मुस्लिम समुदाय के साथ हुए बड़े अन्याय का प्रमाण बताया।
ओवैसी ने विकास के असंतुलित मॉडल पर उठाए सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में विकास के असंतुलित मॉडल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में जो भी विकास हो रहा है, वह सिर्फ कोलकाता की ओर केंद्रित है। मुर्शिदाबाद जैसे जिले विकास से अछूते हैं और वहां के लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है। ओवैसी ने मुर्शिदाबाद के न्याय के लिए कोलकाता में ‘चक्का जाम’ करने की चेतावनी दी, जिससे उनकी बात पर और जोर दिया गया।
अपनी चुनावी सभा में, ओवैसी ने स्थानीय मुद्दों को भी उठाया और एक महत्वपूर्ण वादा किया। उन्होंने कहा कि बीड़ी रोलकर अपनी आजीविका चलाने वाली हमारी माताओं और बहनों के लिए न्यूनतम मजदूरी नीति लागू की जाएगी। यह वादा मुर्शिदाबाद क्षेत्र में एक बड़े वर्ग को प्रभावित करेगा और उनकी आजीविका में सुधार लाने का प्रयास होगा।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती 4 मई को निर्धारित है। AIMIM का यह आक्रामक रुख राज्य की मुस्लिम आबादी के वोटों को अपनी ओर खींचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर तृणमूल कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में।






