पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल के बीच, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। दरअसल इस घटना पर अब शुभेंदु सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने अपनी पहली प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने घटना की निंदा करते हुए भी अभिषेक बनर्जी को ही जनता के आक्रोश का जिम्मेदार ठहराया है।
दरअसल मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने अभिषेक बनर्जी के साथ हुई घटना को गलत करार दिया है, परंतु साथ ही उन्होंने जनता से कानून को अपने हाथ में न लेने की बार-बार अपील भी की। इसके बावजूद, उन्होंने यह कहने में कोई संकोच नहीं किया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए स्वयं अभिषेक बनर्जी ही उत्तरदायी हैं, क्योंकि यह बीते पंद्रह वर्षों के कुशासन और दमनकारी नीतियों का सीधा परिणाम है।
पंद्रह वर्षों तक आम जनता त्रस्त थी
पॉल ने पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि विगत पंद्रह वर्षों तक राज्य में पुलिस की बर्बरता का बोलबाला रहा। एक तरफ पुलिस का दमनचक्र चला, तो दूसरी तरफ जहांगीर शेख और शाहजहां जैसे व्यक्तियों का वर्चस्व कायम रहा, जिससे आम जनता त्रस्त थी। इन सबके ऊपर, अभिषेक बनर्जी का अत्यधिक अहंकार भी इस स्थिति का एक प्रमुख कारक रहा है, जिसने जनता के धैर्य की सीमा को तोड़ दिया।
अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना
दरअसल अग्निमित्रा पॉल ने अभिषेक बनर्जी के अहंकारी रवैये को रेखांकित करते हुए उनके पूर्व के बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि बनर्जी ने कथित तौर पर यह घोषणा की थी कि ‘4 तारीख के बाद डीजे बजाया जाएगा’, जो उनकी सत्ता के मद और जनभावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के प्रति भी अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया था, जिसे जनता ने कभी स्वीकार नहीं किया।
बंगाल की मंत्री ने आगे अपने बयान में कहा कि आज जो स्थिति उत्पन्न हुई है, वह जनता का स्वाभाविक गुस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘पंद्रह साल तक आप स्वयं को खुदा समझते रहे, जनता के ऊपर अपनी मनमानी थोपते रहे। आपने किस प्रकार की राजनीति की, इसका परिणाम आज सामने है।’ पॉल ने वर्तमान परिस्थितियों का वर्णन करते हुए बताया कि अभिषेक बनर्जी पर अंडे फेंके जा रहे हैं, जूते उछाले जा रहे हैं, और लोग उनके घर के सामने थूक रहे हैं तथा गालियां दे रहे हैं। यह सब जनता के भीतर दबी हुई निराशा और क्रोध का ही प्रकटीकरण है, जो अब मुखर हो रहा है।






