Hindi News

महिला आरक्षण की आड़ में मोदी सरकार चल रही ‘शकुनी चाल’, कांग्रेस ने जातिगत जनगणना पर घेरा, लगाए गंभीर आरोप

Written by:Gaurav Sharma
Published:
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून की आड़ में 'शकुनी चाल' चलने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सरकार देश में गलत परिसीमन कर के जातिगत जनगणना से बचना चाहती है, जिससे उत्तर और दक्षिण के राज्यों में विभाजन पैदा हो सकता है। कांग्रेस ने 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के समय पर भी सवाल उठाए हैं।
महिला आरक्षण की आड़ में मोदी सरकार चल रही ‘शकुनी चाल’, कांग्रेस ने जातिगत जनगणना पर घेरा, लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण के पीछे छिपकर ‘शकुनी चाल’ चलने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सरकार का मकसद गलत परिसीमन करना और देश में जातिगत जनगणना न कराना है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने यह बात कही। उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक लेख का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

श्रीनेत ने कहा कि परिसीमन के जरिए छोटे राज्यों और परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले राज्यों को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार जनगणना के आंकड़ों के बिना जो परिसीमन करने जा रही है, वह तरीका गलत होने के साथ-साथ खतरनाक भी है। कांग्रेस के अनुसार, इससे उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच विभाजन पैदा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन का मतलब केवल सीटें बढ़ाना नहीं होता, बल्कि न्यायसंगत प्रतिनिधित्व देना भी है।

बिना जनगणना के आंकड़ों के परिसीमन कैसे संभव है?- कांग्रेस प्रवक्ता

कांग्रेस प्रवक्ता ने जनगणना की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 में अगली जनगणना होनी थी। लेकिन यह प्रक्रिया अब पांच साल पीछे चल रही है। श्रीनेत ने पूछा कि बिना जनगणना के आंकड़ों के परिसीमन कैसे संभव है? उन्होंने उन राज्यों का जिक्र किया जहां एसआईआर (राज्य सूचना रजिस्टर) चल रहा है, और वहां लाखों-करोड़ों लोगों के नाम कटे हैं। इसका मतलब है कि सरकार मान रही है कि अलग-अलग जगहों पर जनसंख्या के आंकड़े बदल रहे हैं। ऐसे में सरकार किस आधार पर परिसीमन करेगी और कैसे तय करेगी कि एससी-एसटी आरक्षित सीटें कौन सी होंगी? उन्होंने यह भी पूछा कि जब जनगणना के पूरे आंकड़े अगले साल 2027 तक उपलब्ध हो जाएंगे, तो सरकार तब तक इंतजार क्यों नहीं कर सकती।

कांग्रेस ने जातिगत जनगणना को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि बिहार और तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वे यह बताते हैं कि पिछड़े वर्ग की जनसंख्या कितनी अधिक है। इसी आधार पर कांग्रेस पार्टी ने 2023 में महिला आरक्षण बिल पारित होते समय ओबीसी महिलाओं के लिए भी आरक्षण देने की मांग की थी। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार जातिगत जनगणना कराने और ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देने से बचने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने याद दिलाया कि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि ‘अर्बन नक्सल’ की सोच वाले लोग जातिगत जनगणना कराना चाहते हैं।

श्रीनेत ने संसद के विशेष सत्र बुलाए जाने के समय पर जताई आपत्ति

श्रीनेत ने 16 अप्रैल से संसद के विशेष सत्र बुलाए जाने के समय पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह सत्र पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे चुनाव प्रचार के बीच बुलाया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चुनावों में इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है और सांसदों से जनता के बीच जाकर प्रचार करने का हक छीना जा रहा है। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने मोदी सरकार को तीन पत्र लिखे थे और 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर संविधान संशोधन पर चर्चा कराए जाने की मांग की थी। लेकिन सरकार ने यह बात नहीं मानी, जिससे उसकी मंशा में खोट और महिला सशक्तिकरण का इरादा न होने का संकेत मिलता है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने 30 महीने पहले सितंबर 2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी जिक्र किया। इस अधिनियम में महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई थी। उस समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने साफ कहा था कि इसे बिना किसी शर्त के 2024 से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने यह बात नहीं मानी थी। श्रीनेत ने सवाल उठाया कि 30 महीने बाद ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही सरकार ने 2023 के कानून में जो शर्तें लगाई थीं, अब उन्हीं को बदलने की तैयारी की जा रही है।

श्रीनेत ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने अपने लेख में यह साफ लिखा है कि महिला आरक्षण तो मुद्दा ही नहीं है, वह पहले ही संसद में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि असली मुद्दा परिसीमन है। श्रीनेत ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह महिला आरक्षण के पीछे छिपकर गलत परिसीमन करना चाहती है और राहुल गांधी द्वारा उठाई गई जातिगत जनगणना की मांग से भाग रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने तीखे सवाल पूछे कि जिन मुद्दों के लिए 16 अप्रैल से विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, क्या उन पर चर्चा हाल ही में खत्म हुए सत्र में नहीं हो सकती थी? उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद एपस्टीन फाइल्स, विफल विदेश नीति, बेरोजगारी और महंगाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं से बचने के लिए मोदी सरकार महिला आरक्षण के पीछे छुपकर देश को उलझाने की चाल चल रही है।

सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी याद दिलाया कि महिला आरक्षण की नींव डालने का काम कांग्रेस पार्टी ने ही किया था। उन्होंने कहा कि पंचायती राज में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण कांग्रेस की सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए दिया था, जिसके जनक राजीव गांधी थे। इसी की बदौलत आज पंचायती राज में 15 लाख से ज्यादा निर्वाचित महिलाएं हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने पार्टी की मांग दोहराई कि मोदी सरकार सभी दलों की बैठक बुलाए और व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय ले।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews