अलवर जिले में बनने वाला सरिस्का एलीवेटेड रोड न केवल स्थानीय परिवहन को बेहतर बनाएगा बल्कि जयपुर और अलवर के बीच की दूरी को लगभग 45 मिनट कम कर देगा। इस परियोजना पर करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सड़क की कुल लंबाई लगभग 22 किलोमीटर होगी और यह नटनी का बारा से शुरू होकर कुशालगढ़, तालवृक्ष और मुंडावर मोड़ से होकर बनेगी।
एनओसी प्रक्रिया और वन भूमि डायवर्जन
पीडब्ल्यूडी-एनएच ने इस परियोजना के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मांगा है। इसके लिए लगभग 16 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव भेजा गया है।
पहले भेजा गया प्रस्ताव सरिस्का प्रशासन ने लौटा दिया था क्योंकि उसमें मैपिंग स्पष्ट नहीं थी। संशोधन के बाद अब प्रस्ताव दोबारा भेजा गया है और सरिस्का प्रशासन ने इसे वन विभाग जयपुर को अग्रेषित कर दिया है। विशेषज्ञ इस प्रस्ताव का अध्ययन करेंगे, जिसके बाद ही अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
लागत कम करने की रणनीति
पूर्व निर्धारित रूट में विभाग की अपनी जमीन नहीं थी, जिससे मुआवजे पर भारी खर्च आने वाला था। इसलिए सरकार ने विभाग को रूट बदलने का निर्देश दिया ताकि लागत को कम किया जा सके। अब संशोधित रूट पर एनओसी मिलने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा।
आगे की राह
सरकारी विभागों के अनुसार, एनओसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया जाएगा। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।





