आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शुमार तिरुपति बालाजी मंदिर के पवित्र लड्डू प्रसादम को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बड़े घोटाले का रूप लेता जा रहा है, जिसकी आंच आंध्र प्रदेश से निकलकर दूर राजस्थान के बीकानेर तक पहुंच गई है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री ने अब पूरे कारोबारी नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिससे देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल से जुड़े इस कथित खेल में शामिल बड़े नामों का खुलासा होने की आशंका गहरा गई है।
दरअसल तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल हुए घी की गुणवत्ता और उसकी खरीद-फरोख्त में हुई कथित धांधली को लेकर चल रही जांच में ईडी की एक विशेष टीम ने बुधवार को राजस्थान के बीकानेर में दस्तक दी। यहां एक प्रमुख प्रतिष्ठान पर दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल शुरू की गई है, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। हैदराबाद से आई ईडी की यह टीम न सिर्फ कारोबारी रिकॉर्ड, बल्कि बैंकिंग ट्रांजेक्शन और संदिग्ध सप्लाई नेटवर्क की हर कड़ी को खंगाल रही है, ताकि इस पूरे ‘खेल’ की तह तक पहुंचा जा सके।
इस मुख्य तथ्य पर ईडी का फोकस?
सूत्रों के मुताबिक, जांच का मुख्य फोकस उस चौंकाने वाले कथित कारोबार पर है, जहां महज ₹300 प्रति किलो की अनुमानित कीमत वाला ‘श्वेता घी’ तिरुपति बालाजी मंदिर तक पहुंचते-पहुंचते ₹1200 प्रति किलो के अविश्वसनीय भाव पर बेचा गया। यह भारी अंतर ही ईडी की जांच के केंद्र में है, जो इस बात की पड़ताल कर रही है कि आखिर इस घी की सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए हुई और पवित्र प्रसादम के लिए इतनी महंगी खरीद का रास्ता किसने तैयार किया। यह सिर्फ गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि आस्था से जुड़े एक बड़े आर्थिक घोटाले का संकेत दे रहा है।
धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ का मामला
वहीं इस पूरे मामले में एक ही परिवार के तीन भाइयों से जुड़े एक बड़े कारोबार की संलिप्तता सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि इन आरोपियों में से एक भाई फिलहाल फरार है, जबकि दूसरा पहले से ही जांच एजेंसियों की गिरफ्त में है। तीसरे भाई की कारोबारी गतिविधियों पर भी ईडी की पैनी नजर है और उसके वित्तीय लेन-देन को बारीकी से खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियां करोड़ों रुपये के इस पूरे नेटवर्क में शामिल सभी किरदारों को बेनकाब करने में जुटी हैं, क्योंकि सवाल सिर्फ मुनाफाखोरी का नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ का भी है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी इस मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बीकानेर में कार्रवाई करते हुए ‘कोयला गली’ स्थित एक फर्म से घी के नमूने एकत्र किए थे। जांच एजेंसियों को यह आशंका है कि तिरुपति भेजे गए कुछ कंसाइनमेंट का सीधा संबंध बीकानेर से हुई इस संदिग्ध सप्लाई से हो सकता है। यह दर्शाता है कि घोटाले की जड़ें कितनी गहरी और दूर तक फैली हुई हैं, और यह सिर्फ स्थानीय स्तर का मामला नहीं है।






