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दमोह में हजारों क्विंटल गेहूं खराब, उमंग सिंघार बोले “किसानों की मेहनत और सरकारी खरीदी व्यवस्था पर लगा घुन”

Written by:Shruty Kushwaha
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नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह किसानों की मेहनत और सरकारी खरीदी व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
दमोह में हजारों क्विंटल गेहूं खराब, उमंग सिंघार बोले “किसानों की मेहनत और सरकारी खरीदी व्यवस्था पर लगा घुन”

Umang Singhar

दमोह जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के बाद वेयरहाउस में संग्रहित गेहूं की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघारने आरोप लगाया है कि जिले में नई खरीदी के दौरान वेयरहाउस भेजी गई 6265 बोरियों में कीड़े और घुन पाए गए, जिसके बाद 3132 क्विंटल गेहूं वापस लौटाना पड़ा।

उन्होंने इस मामले को किसानों की मेहनत और सरकारी खरीदी व्यवस्था की विफलता का उदाहरण बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा राज में किसान अपनी फसल उगाने से लेकर उसे सुरक्षित रखने तक हर मोर्चे पर परेशान हो रहे हैं।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों की मेहनत और सरकारी खरीदी व्यवस्था दोनों पर घुन लग चुका है। उन्होंने कहा कि दमोह के वेयरहाउस में बड़ी मात्रा में गेहूं में कीड़े और घुन मिलना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि किसानों के पसीने और जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की उपज भंडारण के दौरान सुरक्षित नहीं रह पा रही है तो सरकार के कृषि प्रबंधन और खरीदी व्यवस्था संबंधी दावे सवालों के घेरे में हैं। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूरे मामले की जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

हजारों बोरी गेंहू बर्बाद

दमोह जिले से टीकमगढ़ के बड़ोराघाट वेयरहाउस में भंडारण के लिए भेजे गए नए गेहूं की 6265 बोरियों में कीड़े, घुन और मिट्टी मिलने की शिकायत के बाद 3132 क्विंटल गेहूं को अमानक घोषित कर वापस लौटा दिया गया है। इससे पहले दमोह में ही 23 हजार क्विंटल से ज्यादा गेहूं रिजेक्ट हो चुका था। खराब गेहूं पटेरिया, सिंगपुर, कुम्हारी, पड़री सहजपुर, मड़ियादो समेत विभिन्न खरीदी केंद्रों से आया था। अब फिर से इस तरह का मामला सामने आने के बाद भंडारण व्यवस्था, गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासनिक स्तर पर गेहूं की गुणवत्ता और भंडारण संबंधी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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