कलयुगी मां की करतूत, लॉकडाउन के सन्नाटे में सड़क पर छोड़ गई नवजात

कलयुगी मां की करतूत, लॉकडाउन के सन्नाटे में सड़क पर छोड़ गई नवजात

राजगढ़।

मां मेरा क्या कसूर था ,जो मुझे घर के आंगन की बजाए ,सड़क पर फेंक कर चली गई । प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान लोग घरों में कैद है वहीं संवेदनहीनता की पराकाष्ठा वाली माँ सड़क पर नवजात शिशु को छोड़ चली गई । आश्चर्य की बात है कि नवजात का जन्म महज कुछ घण्टो पहले ही हुआ है।

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में लॉक डाउन के दौरान एक मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है राजगढ़ जिले के सेमलापूरा गांव में आज सुबह बीच सड़क पर एक कलयुगी मां अपने 6 से 7 माह के नवजात को बीच सड़क पर फेंक कर चली गई। नवजात के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने देखा और फिर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्चे को लेकर 108 वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खिलचीपुर आई । खिलचीपुर में बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और प्राथमिक उपचार के बाद उसे राजगढ़ के जिला चिकित्सालय में रेफर किया गया। बच्चे को गांव में बीच सड़क पर फेंका इसलिए नवजात जिंदा बच गया यदि उसे गांव से बाहर फेंक दिया होता तो उसे जंगली जानवर या कुत्ते नोच देते।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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