एकादशी के बाद आने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वैशाख माह में आने वाली मोहिनी एकादशी के बाद अब प्रदोष व्रत भी विधि विधान से किया जाएगा। अगर आप इस असमंजस में है की मोहिनी एकादशी के बाद प्रदोष व्रत 28 या 29 अप्रैल में से कब है तो हम आपके लिए जानकारी लेकर आए हैं।
हिंदू पंचांग में हर महीने के शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है । यह दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित किया गया है। इस व्रत के नाम में वार के मुताबिक बदलाव आता है। चलिए जान लेते हैं कि इस बार कौन सा प्रदोष व्रत है और आप इसे कैसे रख सकते हैं।
28 और 29 कब है प्रदोष व्रत
पंचांग के मुताबिक वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल को शाम 6:51 से शुरू होगी और अगले दिन 29 अप्रैल को शाम 7:51 तक रहेगी। कोई भी व्रत त्यौहार उदया तिथि के मुताबिक मनाए जाते हैं लेकिन प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में पूजा का महत्व है इसलिए यह व्रत 28 अप्रैल को किया जाएगा। इस दिन मंगलवार है इसलिए इसे भौम प्रदोष के नाम से पहचाना जाएगा।
भौम प्रदोष का शुभ मुहूर्त
28 अप्रैल मंगलवार को भौम प्रदोष है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए शाम 7:06 रात 9:18 तक का समय शुभ है।
कैसे करें पूजा
- भौम प्रदोष पर सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनें।
- अब आपको पूजा घर में भगवान के समक्ष दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लेना होगा।
- सुबह पूजा पाठ करने के बाद शाम को विधिवत पूजा करें। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजन करने का महत्व माना गया है।
- आप यह पूजा घर या मंदिर कहीं भी कर सकते हैं। अगर घर में शिवलिंग स्थापित है तो पूजा घर पर भी हो सकती है या फिर मंदिर में पूजा करना सबसे उत्तम है।
- पूजा करते समय सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें और फिर बेलपत्र चढ़ाएं। इसके बाद आपको सफेद फूल, अक्षत, तिल का तेल, भांग, धतूरा जैसी चीजें अर्पित करनी है।
- अब शिव मंत्रों का जाप करें या शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। यह सब करने के बाद सबसे आखिर में आरती करें और सभी को प्रसाद बांटे।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






