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सावन में करें बिजली महादेव मंदिर में भगवान के दर्शन, मनोकामनाएं होंगी पूर्ण!

Written by:Sanjucta Pandit
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यदि आप भी किसी ऐसे ही मंदिर की तलाश में हैं, तो आपको यहां अवश्य जाना चाहिए। यहां आपको आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ मानसिक शांति भी मिलेगी।

सावन का महीना हिंदू कैलेंडर में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, इस महीने में चारों ओर हरियाली नजर आती है। इस पावन अवसर पर भक्तगण अपने प्रिय भगवान शिवा की भक्ति में लीन नजर आते हैं। पूरा शहर आध्यात्मिक भावनाओं में डूबा हुआ नजर आता है, हर गली मोहल्ले में स्थित शिव के मंदिरों को फूल और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है, जहां सुबह और शाम उनकी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। यहां श्रद्धालुओं की सुबह से ही काफी अधिक मात्रा में भीड़ लगी होती है। यह महीना बाबा भोलेनाथ को प्रसन्न करने का माना जाता है, जब लोग अपने कंधे पर कावड़ में जल भरकर लाते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।

इस खास महीने में दुनियाभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। यूं तो हम सभी जानते हैं कि यहां पर मौजूद हर एक मंदिर किसी-न-किसी रहस्य से अवश्य भरा रहता है। एक ऐसी ही मंदिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसकी खासियत आपको यहां जाने पर मजबूर कर देगा।

बिजली महादेव मंदिर

इस मंदिर की खासियत जानने के बाद आपको अपने कानों पर भरोसा नहीं होगा, लेकिन यह बिल्कुल सत्य है। यहां की मान्यता हर किसी को अचंभित कर देती है। भगवान शिव के चमत्कारी मंदिरों में से एक मंदिर का नाम बिजली महादेव मंदिर है, जो कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है। जैसा कि नाम से ही समझ में आ रहा है कि मंदिर में बिजली से जुड़ी कुछ मान्यता रही होगी, तो आपको बता दें कि यहां शिवलिंग पर बिजली गिरती है, जिसके बाद यह पूरी तरह से चकनाचूर हो जाता है। हालांकि, टूटने के कुछ दिनों बाद यह खुद ही रहस्यमय तरीके से अपने पूर्ण रूप में वापस आ जाता है, जिसे लोग भगवान का चमत्कार कहते हैं।

हिमाचल की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच कासवारी गांव के पास स्थित यह मंदिर काफी पुराना है। इस मंदिर के पास ही विकास और पार्वती नदी का संगम स्थल भी है। कहते हैं, यह मंदिर जिस पहाड़ी पर स्थित है वह कुलांत नामक राक्षस के शरीर से बना है, जिस कारण इस जिले का नाम कुल्लू पड़ा है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं में कुलांत राक्षस का व्याख्यान भी पाया जाता है, जो की बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली था। वह अपने बल का दुरुपयोग करके व्यास नदी के प्रवाह को रोकना चाहता था, और पूरी घाटी को जल में डूबा देना चाहता था। इस कारण उसने अजगर का रूप धारण किया और जल के प्रवाह को रोकने की कोशिश की। तब भगवान शिव क्रोधित हो उठे। इसके बाद उन्होंने कुलांत को समझने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा। जब राक्षस ने भगवान की बात नहीं मानी, तब भगवान शिव ने उसकी पूंछ पर आग लगाकर उसका अंत कर दिया। उसके मृत शरीर से ही उस पहाड़ की रचना हुई, जहां बिजली महादेव का मंदिर स्थित है।

इंद्र देव को दिया ये आदेश

इस घटनाक्रम के बाद भगवान शिव इंद्र के पास पहुंचे और उन्होंने आदेश दिया कि हर 12 साल में वह कुलांत के शरीर से बने पहाड़ पर बिजली के झटके दें। हालांकि, बिजली गिरने से वहां किसी को भी कष्ट नहीं पहुंचता है, क्योंकि भगवान शिव ने बिजली का प्रहार स्वयं सहने का निर्णय लिया था। ऐसे में आज भी हर 12 साल में एक बार इस शिवलिंग पर बिजली गिरती है। वहीं, मंदिर के पुजारी 12 सालों में बिजली गिरने के बाद शिवलिंग के हुए इन टुकड़ों को एकत्रित करते हैं, जिसके बाद मक्खन, नमक और सत्तू का लेप बनाकर इन टुकड़ों को जोड़ते हैं। कुछ दिन बाद यह शिवलिंग अपने पुराने स्वरूप में लौटने लगता है। इस चमत्कार के रहस्य का वैज्ञानिकों ने भी कई दफा पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन कहते हैं ना, विज्ञान और टेक्नोलॉजी से भी बड़ी दुनिया में एक शक्ति है, जिसे हम भगवान के रूप में जानते हैं।

आप भी करें दर्शन

यदि आप भी सावन के महीने में इस मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो आप जा सकते हैं। हालांकि, यहां जाने का सबसे अनुकूल समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर का महीना माना जाता है, लेकिन भक्त यहां साल भर पहुंचते हैं। यहां का चमत्कार और लोगों की भगवान के प्रति आस्था अपने आप में अद्भुत है। यहां गिरने वाली बिजली का श्रद्धालुओं पर एक प्रतिशत भी नुकसान नहीं होता है।

स्थानीय लोगों की यह मान्यता है कि बिजली महादेव मंदिर में आने वाले श्रद्धालु कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटते। यहां स्वयंभू शिव वास करते हैं, और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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