अधिकमास के अंतिम दिन आई सोमवती अमावस्या ने उज्जैन को एक बार फिर आस्था के रंग में रंग दिया। सुबह सूर्योदय से पहले ही शिप्रा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई देने लगीं। रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर स्नान के लिए इतनी भीड़ उमड़ी कि कई जगहों पर कुंभ मेले जैसा माहौल नजर आया। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पूजा-पाठ, दान और पितरों के निमित्त तर्पण किया।
इस बार सोमवती अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि यह पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास के अंतिम दिन आई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का विशेष फल मिलता है। यही वजह रही कि मध्य प्रदेश ही नहीं, आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग उज्जैन पहुंचे।
सोमवती अमावस्या पर प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए थे। घाटों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई, जबकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी की गईं। सुबह से ही पूरे शहर में धार्मिक माहौल बना रहा और मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।
अमृत सिद्धि योग में स्नान और दान का बढ़ा महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार सोमवती अमावस्या पर कई शुभ संयोग एक साथ बने हैं। सोमवार का दिन, अमावस्या तिथि, मृगशिरा नक्षत्र और अधिकमास का समापन एक साथ होने से यह अवसर बेहद खास माना जा रहा है। अमृत सिद्धि योग के कारण श्रद्धालुओं में धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर उत्साह और अधिक दिखाई दिया।
धर्माचार्यों का कहना है कि इस योग में किए गए दान, जप, तप और पूजा का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में अधिक माना जाता है। इसी वजह से कई श्रद्धालुओं ने जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और अन्य सामग्री का दान भी किया। शिप्रा तट पर कई स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए, जहां लोगों ने परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मकता की कामना की।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को सेवा, दान और सामूहिक भागीदारी का संदेश भी देते हैं। उज्जैन में दिखाई देने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इसी सामाजिक और धार्मिक जुड़ाव का उदाहरण मानी जा रही है।
पितृ तर्पण, महाकाल दर्शन और सूर्य गोचर ने बढ़ाई विशेषता
सोमवती अमावस्या को पितरों की शांति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोगों ने शिप्रा नदी के तट पर तर्पण और श्राद्ध कर्म किए। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए पितृ कर्मों से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
वहीं अधिकमास के समापन के कारण उज्जैन के प्रमुख मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ देखने को मिली। विशेष रूप से महाकाल मंदिर में सुबह से ही दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर परिवार की खुशहाली और बेहतर भविष्य की प्रार्थना की।
इस दिन दोपहर में सूर्य का वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश भी हुआ, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक जानकारों के अनुसार यह परिवर्तन कई राशियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कुल मिलाकर सोमवती अमावस्या, अधिकमास का समापन और सूर्य गोचर का यह महासंयोग उज्जैन में आस्था, श्रद्धा और धार्मिक उत्साह का बड़ा केंद्र बन गया।






