हिंदू धर्म में एकादशी की तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। वैसे तो हर एकादशी का अपना महत्व है लेकिन परम एकादशी को अन्य सभी तिथियों में श्रेष्ठ और फलदायक माना गया है। अगर ये तिथि अधिक मास में आ जाती है तो इसका पुण्य फल और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
आज 11 जून दिन गुरुवार को परम एकादशी का व्रत है। हर 3 वर्ष में एक बार ये व्रत आता है। इसका संबंध अधिक मास के कृष्ण पक्ष से होता है इसलिए इसे खास माना गया। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करता है। उसमें जीवन के सारे दुख और आर्थिक परेशानी दूर हो जाती है। इस बार परम एकादशी का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। चलिए आपको शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियमों के बारे में।
परम एकादशी का मुहूर्त
परम एकादशी की शुरुआत 11 जून की रात 12:57 पर हो चुकी है। इसका समापन 11 जून को रात 10:26 पर हो जाएगा। व्रत करने वाले इसका पारण 12 जून को सुबह 5:23 से 8:10 तक कर सकते हैं।
जानें पूजा विधि
इस दिन की पूजा विधि की बात करें तो सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। अब आपको भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी है। उन्हें पीले फूल, पंचामृत, धूप, दीप और मौसमी फल अर्पित करें। आपको भगवान को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाना है लेकिन उसके साथ तुलसी दल अवश्य रखें। पूजा के दौरान परम एकादशी व्रत की कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए।
इन नियमों का रखें ध्यान
- एकादशी का दिन केवल व्रत के लिए नहीं बल्कि मन की पवित्रता के लिए भी जरूरी माना गया है। यही वजह है कि अपने मन को साफ रखना जरूरी है।
- इस दिन क्रोध न करें और ना ही झूठ बोलें। किसी की निंदा करना और नकारात्मक विचार मन में लाना भी अच्छा नहीं होता।
- एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप जरूर करें।
- व्रत के अगले दिन दान पुण्य करने का विशेष महत्व है। इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






