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कब मनाया जाएगा गणगौर व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Written by:Diksha Bhanupriy
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गणगौर एक ऐसा व्रत है जो सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और कुंवारी लड़कियां मनचाहे जीवन साथी की प्राप्ति के लिए करती हैं।चलिए व्रत की शुभ तिथि विधि और महत्व जान लेते हैं।
कब मनाया जाएगा गणगौर व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

हिंदू पंचांग में गणगौर के व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह तिथि 21 मार्च शनिवार को आ रही है। इस दिन महिलाएं माता गौरी की पूजन अर्जन करती है।

वैसे तो गणगौर की शुरुआत होली के अगले दिन से हो जाती है। 16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत को रीति रिवाज के साथ संपन्न किया जाता है। चित्रा शुक्ला की तृतीया का दिन सबसे खास होता है क्योंकि इस दिन इस पर्व का समापन और विसर्जन होता है। चलिए तिथि कब शुरू हो रही है और किस तरह से पूजा करनी चाहिए यह जान लेते हैं।

कब है गणगौर व्रत

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 21 मार्च 2026 को 2:30 पर होगी। इस तिथि का समापन इसी दिन रात 11:56 पर हो जाएगा। ऐसे में शनिवार 21 मार्च को ही गणगौर का व्रत रखा जाने वाला है।

क्या है पूजा का शुभ समय

इस दिन सूर्योदय सुबह 6:24 पर होगा। ब्रह्म मुहूर्त में पूजा का समय सुबह 4:49 से 5:36 तक है, इसे पूजा की तैयारी और ध्यान के लिए उत्तम माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से शुरू होगा और 12:52 तक चलेगा, किसी भी कार्य की शुरुआत के लिए यह सबसे श्रेष्ठ समय होता है। संध्या का समय 6:32 से 7:43 तक रहेगा, आरती और पूजा के समापन के लिए यह मुहूर्त शुभ है।

क्या है महत्व

गणगौर दो शब्दों से मिलकर बना है इसमें गन का संबंध भगवान शिव और गौर का संबंध माता पार्वती से है। शिव पार्वती से जुड़ा यह त्यौहार पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण से जुड़ा हुआ है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से ये व्रत रखती हैं। कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवन साथी प्राप्त करने के लिए उपासना करती हैं।

कैसे होती है पूजा

गणगौर की पूजा में पवित्र मिट्टी से शिव पार्वती की मूर्तियां बनाई जाती है और उन्हें सुंदर कपड़े पहनाए जाते हैं। होली के अगले दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर दूध और फूल लेकर गीत गाते हुए पूजा करते हैं। पूजा करते समय सोलह सिंगार किया जाता है और गणगौर माता के पारंपरिक लोकगीत घर आंगन में गाए जाते हैं। व्रत के आखिरी दिन इन मूर्तियों को नदी, तालाब और सरोवर में विसर्जित कर दिया जाता है।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

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Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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