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हरियाली तीज पर पढ़ें यह विशेष स्तोत्र, मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी और वैवाहिक सुख

Written by:Bhawna Choubey
Published:
हरियाली तीज 2025 पर अगर आप भी चाहती हैं मनचाहा जीवनसाथी या वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, तो 'पार्वती वल्लभ नीलकंठ अष्टकम' स्तोत्र का पाठ जरूर करें। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा और यह स्तोत्र पढ़ने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है।

हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है। यह व्रत खासकर सुहागिनों और विवाह की इच्छुक युवतियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, झूला झूलती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

लेकिन क्या आप जानती हैं कि इस दिन एक विशेष स्तोत्र पढ़ने से आपकी मनोकामना भी पूरी हो सकती है? हम बात कर रहे हैं ‘पार्वती वल्लभ नीलकंठ अष्टकम’ की। यह स्तोत्र भगवान शिव को समर्पित है और मान्यता है कि इसका पाठ करने से मनचाहा वर प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है।

इस दिन महिलाएं निर्जल व्रत रखती हैं और शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करती हैं। पूजा के बाद ही यह स्तोत्र पाठ किया जाता है।

पार्वती वल्लभ नीलकंठ अष्टकम का महत्व

पार्वती वल्लभ नीलकंठ अष्टकम एक ऐसा स्तोत्र है, जो भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। इसमें उनकी शक्ति, शांति, करुणा और वैराग्य का विस्तृत रूप से उल्लेख है। मान्यता है कि हरियाली तीज के दिन यह स्तोत्र पढ़ने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और स्त्री को मनचाहा वरदान देते हैं।

यह स्तोत्र विशेष रूप से उन कन्याओं के लिए फलदायी माना गया है जो एक अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं। इसके अलावा, विवाहित महिलाएं भी इस स्तोत्र का पाठ कर अपने दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बनाए रख सकती हैं।

स्तोत्र पाठ की विधि और सावधानियां

  • प्रातः स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें
  • शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीप जलाएं
  • फूल, बेलपत्र, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें
  • पूरी श्रद्धा से ‘पार्वती वल्लभ नीलकंठ अष्टकम’ का पाठ करें
  • पाठ के बाद शिव जी की आरती करें और व्रत कथा सुनें
  • यह स्तोत्र किसी भी शिव मंदिर में जाकर भी पढ़ा जा सकता है, लेकिन अगर घर पर कर रही हैं तो भी इसका उतना ही महत्व है। व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें और मन, वाणी और कर्म से शुद्ध रहें।

हरियाली तीज पर स्तोत्र पाठ क्यों है इतना प्रभावशाली?

हरियाली तीज केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, यह आस्था और आत्मिक जुड़ाव का पर्व है। जब महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव का ध्यान करती हैं, तो यह न सिर्फ आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाता है, बल्कि आत्मबल और सकारात्मकता भी देता है।

ऐसे में यदि पारंपरिक पूजा के साथ-साथ विशेष स्तोत्र का पाठ किया जाए, तो इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। पार्वती वल्लभ नीलकंठ अष्टकम का पाठ न केवल आपकी मनोकामनाएं पूरी कर सकता है, बल्कि आपको भगवान शिव की कृपा से भरपूर जीवन भी दे सकता है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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