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होलिका दहन 2026: जलती होली देखने से पहले जान लें, किन महिलाओं को रहना चाहिए दूर?

Written by:Bhawna Choubey
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होलिका दहन 2026 इस बार बेहद खास है क्योंकि फाल्गुन पूर्णिमा की रात चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किन महिलाओं को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए और क्यों? जानिए परंपरा, मान्यता और असर।
होलिका दहन 2026: जलती होली देखने से पहले जान लें, किन महिलाओं को रहना चाहिए दूर?

साल 2026 का होलिका दहन सिर्फ रंगों के त्योहार की शुरुआत नहीं है, बल्कि इस बार यह एक खास संयोग के कारण सुर्खियों में है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात चंद्र ग्रहण लगने की खबर ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया और गूगल पर यह सवाल खूब सर्च किया जा रहा है कि होलिका दहन 2 मार्च को करें या 3 मार्च को। इसके साथ ही एक और सवाल तेजी से सामने आया है, आखिर किन लोगों को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए?

हम सब जानते हैं कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा यह पर्व आस्था और विश्वास से भरा हुआ है। लेकिन परंपराओं में कुछ ऐसी मान्यताएं भी हैं, जिनके अनुसार कुछ खास महिलाओं और बच्चों को जलती हुई होली देखने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और मान्यताएं।

होलिका दहन का महत्व और प्रह्लाद की कथा

होलिका दहन की जड़ें पुराणों में मिलती हैं। कथा के अनुसार, दैत्यराज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। पिता ने उसे कई बार मारने की कोशिश की। अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई।

इसी घटना की याद में हर साल होलिका दहन किया जाता है। यह संदेश देता है कि सच्चाई और भक्ति की जीत होती है। लेकिन इसी अग्नि से जुड़ी कुछ मान्यताएं भी हैं, जिनके कारण कुछ लोगों को इसे देखने से मना किया जाता है।

प्रेग्नेंट महिलाओं को क्यों नहीं देखना चाहिए होलिका दहन?

परंपरागत मान्यता के अनुसार गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। इसका कारण सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा माना जाता है। पहला कारण यह बताया जाता है कि होलिका की अग्नि तेज होती है और उससे निकलने वाला धुआं गर्भवती महिला के लिए ठीक नहीं होता। तेज गर्मी और धुआं उनके और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

दूसरी मान्यता यह है कि फाल्गुन पूर्णिमा की रात कुछ नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। ऐसे में गर्भवती महिला को घर के अंदर सुरक्षित रहने की सलाह दी जाती है। कई लोग यह भी कहते हैं कि गर्भवती महिला को होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस बात की पुष्टि नहीं करता, लेकिन परिवारों में आज भी यह परंपरा निभाई जाती है।

नवजात शिशु को होलिका दहन में क्यों नहीं ले जाना चाहिए?

मान्यता है कि नवजात शिशु बहुत कोमल और संवेदनशील होता है। उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में होलिका दहन के दौरान आग का धुआं, भीड़ और शोर उसके लिए हानिकारक हो सकता है।

कई बुजुर्गों का मानना है कि इस रात नकारात्मक शक्तियां ज्यादा सक्रिय रहती हैं। इसलिए छोटे बच्चों को बाहर नहीं ले जाना चाहिए। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो भीड़ और धुएं से दूर रखना शिशु के लिए सुरक्षित होता है।

सास-बहू को साथ में क्यों नहीं देखनी चाहिए जलती होली?

कुछ इलाकों में यह मान्यता है कि सास और बहू को एक साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से उनके रिश्तों में तनाव आ सकता है। यह पूरी तरह लोक परंपरा पर आधारित मान्यता है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन कई परिवार इसे आज भी मानते हैं। रिश्तों की मिठास बनाए रखने के लिए कुछ लोग इस परंपरा का पालन करते हैं।

इकलौती संतान की मां के लिए क्या है मान्यता?

यह भी माना जाता है कि जिन महिलाओं की सिर्फ एक संतान है, उन्हें होलिका दहन देखने से बचना चाहिए। इसका संबंध भक्त प्रह्लाद की कथा से जोड़ा जाता है, क्योंकि वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। ऐसा माना जाता है कि अग्नि से जुड़ी इस कथा के कारण इकलौती संतान की मां को सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि यह पूरी तरह आस्था पर आधारित है।

जिसकी शादी तय हो चुकी हो, वह क्यों न देखे होलिका दहन?

कई जगह यह परंपरा है कि जिस लड़की की शादी तय हो चुकी हो और वह नए जीवन की शुरुआत करने वाली हो, उसे होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। मान्यता है कि विवाह जीवन का नया अध्याय है और इस समय लड़की को किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहना चाहिए। इसलिए उसे जलती हुई होली देखने से मना किया जाता है।

होलिका दहन 2026 और चंद्र ग्रहण का संयोग

साल 2026 में होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग चर्चा में है। ग्रहण के समय पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों को लेकर अलग-अलग मत होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण का समय संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि लोग तिथि और मुहूर्त को लेकर भ्रम में हैं। विशेषज्ञों की मानें तो सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानकर ही होलिका दहन करना चाहिए।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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