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कुंडली में कब बनता है अंगारक दोष? जानें असर और आसान उपाय

Written by:Bhawna Choubey
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अंगारक दोष कब बनता है, क्यों कई लोगों की जिंदगी में अचानक गुस्सा, संघर्ष, बाधाएं और अस्थिरता बढ़ जाती है? जानें ज्योतिष के अनुसार मंगल और राहु के इस दुर्लभ योग का असर, लक्षण और प्रभावी उपाय जो सच में राहत दे सकते हैं।
कुंडली में कब बनता है अंगारक दोष? जानें असर और आसान उपाय

कभी-कभी हमारी जिंदगी में कुछ ऐसी मुश्किलें सामने आती हैं जिनका कोई सीधा जवाब नहीं मिलता—कई बार मेहनत भी उम्मीद के मुताबिक फल नहीं देती, रिश्तों में तनाव अचानक बढ़ जाता है, और गुस्सा इतना तेज हो जाता है कि छोटी बात भी बड़ी बन जाती है। ज्योतिष में माना जाता है कि जब ये समस्याएं लगातार चलें और कारण समझ न आए, तब सबसे पहले कुंडली में एक चीज देखी जाती है,अंगारक दोष।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह दोष बनता कैसे है? क्या यह हर किसी को प्रभावित करता है? और यदि कुंडली में अंगारक दोष मौजूद हो तो इससे निकलने का रास्ता क्या है? इन्हीं सवालों के जवाब लेकर हम आपके लिए लाए हैं यह विस्तृत विश्लेषण, जो सिर्फ ज्योतिषीय भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आम इंसान की जिंदगी में इसके वास्तविक प्रभावों को भी समझाता है।

कुंडली में अंगारक दोष कैसे बनता है?

अंगारक दोष तब बनता है जब कुंडली में मंगल (Mars) और राहु (Rahu) एक ही भाव में या एक-दूसरे के काफी करीब स्थित हों। मंगल अग्नि, साहस, ऊर्जा, क्रोध और प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि राहु भ्रम, अतिरेक, लालच, अस्थिरता और मानसिक तनाव का।
जब ये दोनों ग्रह साथ आते हैं तो ऊर्जा असंतुलित हो जाती है। यही टकराव अंगारक दोष कहलाता है।

अंगारक दोष: प्रभाव कितना गंभीर हो सकता है?

अंगारक दोष का प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग ढंग से पड़ता है। कई बार इसका असर इतना हल्का होता है कि व्यक्ति को पता भी नहीं चलता, लेकिन कई बार ये जीवन में बड़ा मोड़ भी बन जाता है। अगर यह योग कमजोर भाव में बने तो असर सीमित रहता है, लेकिन कर्म भाव, लग्न, चौथे या आठवें भाव में हो तो परिणाम गहरे हो सकते हैं।
ज्योतिष में इसे इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि मंगल शरीर की ऊर्जा और राहु दिमाग की दिशा को प्रभावित करता है इसलिए दोनों साथ हो तो सोच और क्रिया में टकराव पैदा होता है।

कुंडली में कब बनता है अंगारक दोष?

जब मंगल राहु की दृष्टि में हो

कभी-कभी दोनों एक साथ न हों, लेकिन राहु मंगल को देख रहा हो। इसे भी आंशिक अंगारक दोष माना जाता है।
3. जब मंगल राहु की नक्षत्र में हो (नक्षत्राधिपति योग)
यह कम चर्चा में आता है, लेकिन अनुभवी ज्योतिषी इसे भी प्रभावी मानते हैं।

कुंडली का दशा-भुक्ति काल

यदि व्यक्ति की दशा (वर्तमान ग्रह चक्र) में मंगल-राहु का समय चल रहा हो, तो दोष का असर अचानक बढ़ जाता है अगर यह बहुत मजबूत रूप में कुंडली में न भी बना हो।

अंगारक दोष होने पर क्या महसूस होता है?

1. गुस्सा अचानक बढ़ जाना
छोटी बातों पर गुस्सा आना, या नियंत्रण न कर पाना यह इसका सबसे सामान्य लक्षण है।

2. रिश्तों में अनबन
राहु गलतफहमियां बढ़ाता है, मंगल वाणी को तीखा बनाता है दोनों मिलकर रिश्तों में तनाव पैदा कर सकते हैं।

3. आर्थिक नुकसान या गलत फैसले
जल्दी फैसले लेते समय गलती होना, लालच में आकर जोखिम उठाना यह भी राहु और मंगल का मेल दिखाता है।

4. बार-बार दुर्घटनाएं
अगर यह दोष आठवें या लग्न में हो, व्यक्ति छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं की चपेट में आ सकता है।

5. अस्थिर करियर
जॉब बदलने की मजबूरी, प्रमोशन रुकना, अधिकारियों से टकराव ये सब भी इसी योग से जुड़े अनुभव हैं।

6. मानसिक बेचैनी और नींद की समस्या
राहु मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है, मंगल ऊर्जा को।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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