Hindi News

कौन है खाटू नरेश? महाभारत काल से जुड़ा है यह रहस्य! जानिए क्यों कहा जाता है उन्हें कलयुग का अवतारी

Written by:Rishabh Namdev
Published:
क्या आप जानते हैं, खाटू श्याम जी की कहानी क्या है? वह कौन हैं और उनसे जुड़े रहस्यों के बारे में? अगर आप भी यह नहीं जानते, तो चलिए आज हम आपको इसकी जानकारी दे रहे हैं। चलिए जानते हैं, कौन हैं राजस्थान के सीकर में विराजे खाटू श्याम जी।
कौन है खाटू नरेश? महाभारत काल से जुड़ा है यह रहस्य! जानिए क्यों कहा जाता है उन्हें कलयुग का अवतारी

हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जिनकी भक्ति में भक्त हमेशा डूबे रहते हैं। इन्हीं में से एक स्थान ऐसा भी है, जहां पर लगातार भीड़ बढ़ती ही जा रही है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के सीकर में विराजे खाटू श्याम जी की। खाटू श्याम जी का रहस्य बेहद ही गहरा है। युवाओं में भी खाटू श्याम जी की भक्ति का क्रेज दिखाई देता है। मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जाती है। खासकर ग्यारस पर इस भीड़ को कंट्रोल कर पाना भी मुश्किल होता है, लेकिन बेहद कम लोग खाटू श्याम जी की कहानी जानते हैं।

अगर आप भी खाटू श्याम जी से जुड़े रहस्य और उनकी कहानी नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बता रहे हैं। चलिए जानते हैं, राजस्थान के सीकर में विराजे खाटू श्याम जी को लेकर क्या मान्यताएं हैं और उन्हें क्यों कलयुग का अवतारी कहा जाता है।

जानिए कौन है खाटू श्याम?

दरअसल, खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में रिंगस के नजदीक खाटू में स्थित है। इस मंदिर में ग्यारस के दिन बड़ी मात्रा में भक्त पहुंचते हैं। वैसे तो हर दिन बाबा के दरबार में भीड़ लगी रहती है, लेकिन ग्यारस को बेहद ही खास माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त खाटू नरेश के दर्शन के लिए आते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। खाटू श्याम को श्रीकृष्ण का कलयुग अवतार भी माना जाता है। उनका जन्म कार्तिक शुक्ल की देवउठनी ग्यारस के दिन मनाया जाता है। इस दिन खाटू नगरी में बड़ी भीड़ देखने को मिलती है। श्रद्धालु विशेष झंडा लेकर रिंगस से खाटू नगरी तक पहुंचते हैं और बाबा के दर्शन करके मनोकामनाएं करते हैं।

महाभारत काल से जुड़ा है नाता 

हिंदू पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन माह के शुक्ल षष्ठी से लेकर द्वादशी तक खाटू श्याम के मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। पौराणिक कथाओं की मानें तो खाटू श्याम, पांडव पुत्र भीम के पौत्र थे, जिनका नाम बर्बरीक था। दरअसल, भीम के पुत्र का नाम घटोत्कच था और उनके पुत्र का नाम बर्बरीक था। बर्बरीक की माता हिडिंबा थी। आज के समय में बर्बरीक को ही बाबा खाटू श्याम जी के नाम से पहचाना जाता है।

यह भी है मान्यताएं

मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत के दौरान बर्बरीक को श्रीकृष्ण ने कलयुग में स्वयं के नाम से पूजे जाने का वरदान दे दिया था। इसलिए आज खाटू श्याम को कृष्ण भगवान के नाम से ही पूजा जाता है। सपने में दर्शन देने के बाद खाटू धाम में स्थित कुंड से बाबा प्रकट हुए और श्रीकृष्ण शालिग्राम के रूप में मंदिर में विराजमान हुए। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था, इसलिए खाटू श्याम जी को ‘शीश दानी’ भी कहा जाता है। इसके अलावा उन्हें ‘मोर्छीधारी’ भी कहा जाता है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर भी माना जाता है।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
Follow Us :GoogleNews