चैत्र नवरात्रि में सभी दिनों का बहुत महत्व माना गया है। इसके आखिरी दिन यानी महानवमी को माता दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा करने का विधान है। ऐसा कहते हैं कि माता के इस रूप की पूजन से जीवन में सुख समृद्धि का वास बना रहता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो व्यक्ति विधि विधान से माता सिद्धिदात्री की पूजा करता है। उसे पूर्णता, मोक्ष और आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति होती है। चलिए जान लेते हैं कि आप देवी को कैसे प्रसन्न कर सकते हैं।
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माता सिद्धिदात्री का स्वरूप
सबसे पहले माता सिद्धिदात्री के स्वरूप के बारे में जान लेते हैं। उनका स्वरूप बहुत ही शांत और मुस्कान से भरा हुआ है। वह कमल के आसन पर विराजमान है और सिंह की सवारी भी करती हैं। उनकी चार भुजाएं हैं, जिसमें दाहिने हाथ में गदा दूसरे में चक्र, बाएं हाथ में कमल का फूल और दूसरे हाथ में शंख विराजमान है।
कैसे करें पूजा
- माता सिद्धिदात्री की पूजा के लिए सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अगर यह वस्त्र बैंगनी या जामुनी रंग के होंगे तो बेहतर होगा।
- अब आपको पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता की तस्वीर या फिर प्रतिमा स्थापित करना है।
- अब उन्हें गंगाजल से स्नान करवाकर कुमकुम और रोली अर्पित करें।
- आपको माता को हलवा, पूरी, नारियल और चने का भोग लगाना है।
- आखिर में घी का दीपक जलाएं और आरती करें।
महानवमी पर मिलेगी ये सिद्धियां
माता सिद्धिदात्री का यह स्वरूप भक्तों के जीवन में सुख शांति और समृद्धि लेकर आता है। उनके इस स्वरूप में नो संध्या विराजमान है जिनमें अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व शामिल है। ऐसा कहते हैं कि स्वयं भगवान शिव ने माता की कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था।
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