हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने अध्यात्म के जरिए अपने जीवन की दिशा को बदला। राजकुमार वर्धमान से महावीर स्वामी बनने की उनकी कहानी काफी दिलचस्प है।

इस साल 31 मार्च 2026 को महावीर जन्मोत्सव मनाया जाएगा। ये ऐसा दिन है जिसका जैन समुदाय को साल भर इंतजार होता है। चलिए आज आपको बताते हैं कि महावीर जयंती कैसे मनाई जाती है और कैसे वर्धमान, भगवान महावीर बने ये भी जान लेते हैं।

कैसे मनाई जाती है महावीर जयंती

महावीर जयंती का दिन जैन समुदाय के लिए त्यौहार की तरह होता है। इस दिन मंदिरों की सजावट की जाती है और भगवान महावीर का अभिषेक किया जाता है। रथ यात्रा निकलने के साथ दान पुण्य किया जाता है। इस दिन भगवान महावीर की पंचमहाव्रत शिक्षाएं सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह को याद किया जाता है, जो हैं धर्म की आधारशिला है।

कैसे राजकुमार से बने भगवान महावीर

तकरीबन 2500 साल पहले वैशाली गणराज्य के क्षत्रिय कुंड नामक एक गांव में रहने वाले क्षत्रिय राज परिवार में भगवान महावीर का जन्म हुआ था। उनके पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला थीं। राजश्री परिवार में जन्मे वर्धमान में 30 साल की उम्र में राजपाट त्याग दिया और ज्ञान की तलाश में तपस्या करने निकल पड़े। 12 वर्षों तक उन्होंने कठिन तप किया और ऋजुबालिका नदी के तट पर स्थित शाल वृक्ष के नीचे उन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति हुई। दिव्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद उन्होंने उडीसा, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्र में भ्रमण कर धर्म का प्रचार प्रसार किया। 72 वर्ष की उम्र में कार्तिक अमावस्या पर दीपावली के दिन भगवान महावीर ने मोक्ष प्राप्त किया था।