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साल का पहला शनि प्रदोष व्रत, इन उपायों से शांत होगा शनि का प्रकोप, मिलेगी राहत

Written by:Bhawna Choubey
Published:
साल का पहला शनि प्रदोष व्रत भक्तों के लिए बेहद खास माना जा रहा है। सही पूजा-विधि और सरल उपाय अपनाकर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत पाने का यह विशेष अवसर है, जानिए क्या करें और क्या न करें।
साल का पहला शनि प्रदोष व्रत, इन उपायों से शांत होगा शनि का प्रकोप, मिलेगी राहत

हम सबने अक्सर सुना है कि जब जीवन में परेशानियाँ अचानक बढ़ने लगती हैं, काम अटकने लगते हैं और मन बेचैन रहने लगता है, तो लोग कहते हैं, शनि का प्रभाव चल रहा है। ऐसे समय में श्रद्धालु भगवान शिव और शनि देव की शरण लेते हैं। इसी आस्था से जुड़ा है शनि प्रदोष व्रत, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है।

हम आपको बता दें कि इस बार साल का पहला शनि प्रदोष व्रत भक्तों के लिए खास अवसर लेकर आया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और कुछ सरल उपाय करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिल सकती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव शुरू होते हैं।

प्रदोष व्रत क्या है और इसका महत्व क्यों बढ़ जाता है शनिवार को?

हम देखते हैं कि हर महीने दो बार त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। शाम के समय प्रदोष काल में पूजा की जाती है।

लेकिन जब यह व्रत शनिवार को पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन शिव पूजा के साथ शनि देव की आराधना का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इससे जीवन की अड़चनें कम होती हैं और मन को शांति मिलती है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि शनिवार के दिन शनि देव कर्मों के अनुसार फल देते हैं, इसलिए इस दिन किया गया जप और दान विशेष फलदायी माना जाता है।

साढ़ेसाती और ढैय्या क्या होती है?

हम आमतौर पर सुनते हैं कि किसी पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है या ढैय्या लगी है। दरअसल, यह ज्योतिष से जुड़ी मान्यता है। जब शनि ग्रह किसी राशि पर विशेष प्रभाव डालते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।

इस दौरान लोगों को नौकरी, व्यापार, स्वास्थ्य या परिवार से जुड़ी परेशानियाँ महसूस हो सकती हैं। हालांकि, विद्वानों का कहना है कि शनि केवल सजा नहीं देते, बल्कि व्यक्ति को अनुशासन और मेहनत का महत्व भी सिखाते हैं। इसी कारण लोग शनि प्रदोष व्रत के दिन विशेष पूजा और उपाय करते हैं, ताकि नकारात्मक प्रभाव कम हो और जीवन में स्थिरता आए।

शनि प्रदोष व्रत पर करें ये सरल और प्रभावी उपाय

उड़द दाल और लोहे का दान
इस दिन काली उड़द दाल और लोहे की वस्तु का दान करना शुभ माना जाता है। इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होने की मान्यता है।

शनि मंत्र का जप
“ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का जप करने से मानसिक शांति मिलती है। श्रद्धालु कम से कम 108 बार मंत्र जप करते हैं।

सरसों तेल का उपाय
लोहे के पात्र में सरसों का तेल भरकर उसमें लाल फूल डालकर घर के मध्य भाग में रखना सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।

पीपल वृक्ष की पूजा
सुबह पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और शाम को दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इससे घर में शांति का वातावरण बनने की मान्यता है।

हनुमान जी की पूजा
शनिवार को हनुमान जी की पूजा भी शनि दोष कम करने से जोड़ी जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं।

पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

  • पूजा से पहले घर की साफ-सफाई करें।
  • शांत मन से शिव और शनि देव का ध्यान करें।
  • जरूरतमंदों की मदद करें।
  • गलत कार्यों से दूर रहने का संकल्प लें।
  • इन छोटे कदमों को भी शुभ माना जाता है।

 

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